ऐसी अनुमति नहीं देंगे: मुंबई में CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित अवैध हिरासत पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

  • ऐसी अनुमति नहीं देंगे: मुंबई में CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित अवैध हिरासत पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह अवैध हिरासत की अनुमति नहीं देगा। कोर्ट मुंबई में 10 और 11 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों और राहगीरों को हिरासत में लिए जाने के आरोपों वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

    चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ सागर कांतिलाल देवरे की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि 10 अक्टूबर को करीब 600 लोगों और 11 अक्टूबर को 300 अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया। याचिका के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में राहगीर, महिलाएं, एक बच्चे के साथ मां और एक बुजुर्ग व्यक्ति भी शामिल थे।

    चीफ जस्टिस त्रिपाठी ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,

    “हम इस मुद्दे को देखेंगे, लेकिन जाहिर है कि हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।”

    हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कथित अवैध हिरासत की विशिष्ट घटनाओं को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

    खंडपीठ ने कहा,

    “हर बात रिकॉर्ड पर लेकर आइए। हम सीधे यह नहीं कह सकते कि किसी को भी हिरासत में न लिया जाए, लेकिन हर घटना का उदाहरण रिकॉर्ड पर रखना होगा।”

    सरकारी वकील ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें याचिका की प्रति अभी-अभी मिली है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित की।

    जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों को उनके घरों से भी उठाया गया, क्योंकि जुलाई 2026 में हुए प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर में उनके नाम थे। याचिका के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट इन एफआईआर को पहले ही रद्द कर चुका है, इसके बावजूद इन लोगों को हिरासत में लिया गया।

    याचिकाकर्ता ने सीसीटीवी फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, हिरासत में लिए गए लोगों की सत्यापित सूची तैयार करने और कथित बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

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