बच्चे का हित सर्वोपरि, विदेशी अदालत का आदेश बाध्यकारी नहीं: ब्रिटिश कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने की खारिज
Amir Ahmad
8 April 2026 5:45 PM IST

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी नाबालिग बच्चे के मामले में उसका कल्याण सर्वोपरि होता है और विदेशी अदालतों के आदेश इस सिद्धांत से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत ने ब्रिटेन की अदालत के आदेश को लागू कराने की मांग वाली पिता की याचिका खारिज की।
जस्टिस चीकाटी मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तुहिन कुमार गेडेला की खंडपीठ ने पिता द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिका का उपयोग विदेशी अदालत के आदेश लागू कराने के लिए नहीं किया जा सकता।
मामला एक ब्रिटिश नागरिक पिता से जुड़ा था, जिसकी नाबालिग बेटी भी ब्रिटेन की नागरिक है। वैवाहिक विवाद के बाद मां भारत लौट आई। बाद में ब्रिटेन की फैमिली कोर्ट की अनुमति से बच्ची छुट्टियों में भारत आई, जहां उसे कुछ समय के लिए दादा-दादी के पास छोड़ा गया, लेकिन वह वहीं रह गई।
पिता ने ब्रिटेन की अदालतों से बच्ची को वापस भेजने के आदेश हासिल किए और फिर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बच्ची की कस्टडी मांगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत का मुख्य दायित्व बच्चे के संरक्षक के रूप में उसके हितों की रक्षा करना है।
अदालत ने विशेष रूप से कहा,
“इस उम्र में बच्ची को मां की देखभाल और विशेष ध्यान की आवश्यकता होती है, जिसे अकेले रहने वाला पिता उतनी प्रभावी तरह से नहीं दे सकता।”
अदालत ने यह भी माना कि जब पिता ने स्वयं बच्ची को दादा-दादी के पास छोड़ा था तो वर्तमान स्थिति को अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता।
विदेशी अदालत के आदेशों पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी विदेशी अदालत ने आदेश दिया है बच्चे की कस्टडी अपने आप अवैध नहीं हो जाती।
अदालत ने ब्रिटेन की अदालत की टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई, जिसमें भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को सीमित बताया गया था। हाइकोर्ट ने इसे “औपनिवेशिक मानसिकता” करार देते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर ऐसा दृष्टिकोण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अंत में अदालत ने पिता को राहत देते हुए यह अनुमति दी कि वह अपनी बेटी से रोज वीडियो कॉल के जरिए बात कर सके और हर साल उसे इंग्लैंड ले जाने की अनुमति भी दी, जब तक वह बालिग नहीं हो जाती।

