सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने से पासपोर्ट नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

11 Jun 2026 6:30 PM IST

  • सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने से पासपोर्ट नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने मात्र से पासपोर्ट के नवीनीकरण या जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सक्षम आपराधिक अदालत किसी मामले में संज्ञान नहीं लेती, तब तक उसे पासपोर्ट कानून के तहत लंबित न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने यह आदेश एक 16 वर्षीय किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। किशोर ने पासपोर्ट जारी करने के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था। हालांकि पुलिस सत्यापन रिपोर्ट में उसके आपराधिक मामले में नाम आने का उल्लेख होने के कारण पासपोर्ट कार्यालय ने स्पष्टीकरण मांगा था।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित मामले में पुलिस ने अभी तक अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल नहीं की और न ही किसी अदालत ने मामले का संज्ञान लिया।

    अदालत ने कहा कि यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन अभी तक किसी न्यायालय ने उस मामले में संज्ञान नहीं लिया। इसलिए इसे ऐसी लंबित आपराधिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता, जो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(2)(फ) के तहत पासपोर्ट जारी करने में बाधा बने।

    हाईकोर्ट ने अपने पूर्व खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी आपराधिक अदालत द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाता, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही लंबित है।

    अदालत ने कहा,

    "जब तक किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। केवल आपराधिक मामला लंबित होना पासपोर्ट के नवीनीकरण में बाधा नहीं बन सकता। विदेश यात्रा का अधिकार भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।"

    हाईकोर्ट ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के उन निर्णयों का भी उल्लेख किया, जिनमें निर्दोषता की धारणा और विदेश यात्रा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना गया।

    याचिका का निस्तारण करते हुए अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि वह पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के प्रावधानों के अनुसार याचिकाकर्ता के आवेदन पर शीघ्र निर्णय लें।

    साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्णय लेते समय केवल लंबित अपराध संख्या को आधार न बनाया जाए।

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