वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

7 May 2026 3:45 PM IST

  • वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुलह का उद्देश्य पति-पत्नी को गोपनीय माहौल में आमने-सामने बातचीत का अवसर देना होता है, जिसे वर्चुअल माध्यम से प्रभावी ढंग से पूरा नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस रवि नाथ तिलहरी ने यह फैसला अमेरिका के टेक्सास में रह रहे एक पति की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे सुलह प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति देने से इनकार किया गया।

    पति का कहना था कि उसके नियोक्ता ने भारत आने के लिए छुट्टी देने से मना किया, इसलिए उसे वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

    याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट्स के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2023 का हवाला देते हुए कहा गया कि इन नियमों के तहत न्यायिक कार्यवाही के हर चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह भी दलील दी गई कि वैवाहिक विवाद भी न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा हैं इसलिए सुलह प्रक्रिया में भी यह सुविधा दी जा सकती है।

    हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के संथिनी बनाम विजया वेंकटेश मामला में तय हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग केवल तब संभव है जब सुलह की कोशिशें विफल हो जाएं और दोनों पक्ष सहमति दें।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “सुलह की प्रक्रिया में पक्षकारों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है, क्योंकि इसका उद्देश्य गोपनीय वातावरण में प्रत्यक्ष संवाद के जरिए समझौते की संभावना तलाशना होता है।”

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम केवल प्रक्रिया संबंधी नियम हैं। इन्हें इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों या कानून के प्रावधानों के विपरीत जाकर हर परिस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को अनिवार्य बना दें।

    कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 11 के तहत पारिवारिक मामलों की कार्यवाही बंद कमरे में करने का प्रावधान है और इसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

    फैसले में अदालत ने साफ कहा कि वैवाहिक मामलों में सुलह की प्रक्रिया पूरी तरह विफल होने के बाद ही, और दोनों पक्षों की सहमति से, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सहारा लिया जा सकता है।

    इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की।

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