CBSE Class XII Boards: खाड़ी देशों के प्राइवेट छात्रों के मूल्यांकन के लिए CBSE द्वारा फॉर्मूला लाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निपटाई
सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित CBSE कक्षा 12 के निजी विद्यार्थियों से जुड़े मामले का निपटारा किया। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि ऐसे विद्यार्थियों के परिणाम घोषित करने के लिए नई राष्ट्रीय नीति अधिसूचित कर दी गई है, जिसके बाद अदालत ने याचिका समाप्त की।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ के समक्ष केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पश्चिम एशिया के देशों में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण रद्द हुई परीक्षाओं से प्रभावित विद्यार्थियों के लिए देशव्यापी नीति तैयार की गई।
मामला सऊदी अरब के अल जुबैल निवासी निजी अभ्यर्थी प्रणसू जिगरकुमार पटेल की याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि CBSE ने कक्षा 12 सुधार परीक्षा का उसका परिणाम घोषित नहीं किया, जबकि युद्ध जैसे हालात के कारण कई खाड़ी देशों में परीक्षाएं रद्द होने पर नियमित विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाई गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि 27 मार्च 2026 की मूल्यांकन योजना में केवल नियमित विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जबकि सुधार परीक्षा देने वाले निजी अभ्यर्थियों के बारे में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई। इसी कारण उसका परिणाम रिजल्ट लेटर के रूप में रोका गया, जिससे उसकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हुईं।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने बताया कि सात खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित विद्यार्थियों की दो श्रेणियां थीं नियमित विद्यार्थी और निजी अभ्यर्थी। निजी अभ्यर्थियों के मामले में चुनौती यह थी कि उनके पास विद्यालयीय आंतरिक मूल्यांकन के अंक उपलब्ध नहीं थे जिनके आधार पर पहले की योजना तैयार की गई।
उन्होंने बताया कि 21 जून 2026 को अधिसूचित नई नीति के तहत निजी अभ्यर्थियों के लिए अलग मूल्यांकन फॉर्मूला तय किया गया। जिन विषयों की परीक्षाएं रद्द हुईं, उनमें अंक कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा के सैद्धांतिक अंकों के 40 प्रतिशत और कक्षा 12 के बोर्ड परीक्षा के सैद्धांतिक अंकों के 60 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे। कक्षा 10 के लिए विद्यार्थी के सर्वाधिक अंक वाले तीन विषयों का औसत लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता के मामले में भौतिकी और रसायन विज्ञान की परीक्षा आयोजित हुई, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान की परीक्षाएं रद्द हो गई थीं। पहले दो विषयों में वास्तविक अंक दिए गए, जबकि शेष तीन विषयों का मूल्यांकन नई नीति के तहत किया गया।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि नई गणना के अनुसार याचिकाकर्ता के अंक उसके पहले के प्रदर्शन से बेहतर आए हैं। परिणाम उसे ईमेल के माध्यम से भेज दिया गया और शीघ्र ही डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। नीति में यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी निर्धारित अंकों से संतुष्ट नहीं है तो वह अगली नियमित परीक्षा में शामिल हो सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह आग्रह किया गया कि उसे उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन का अधिकार सुरक्षित रखा जाए। हालांकि पीठ ने कहा कि यह मांग मूल याचिका का हिस्सा नहीं थी।जस्टिस एसवीएन भट्टी ने कहा कि परीक्षा संबंधी मामलों में अदालत सामान्यतः हस्तक्षेप करने से बचती है। उन्होंने माना कि नई नीति और परिणाम घोषित किए जाने के बाद याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत का समाधान हो गया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नई नीति और सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा किया। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को कोई अन्य शिकायत शेष है तो वह कानून के अनुसार उचित उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेगा।