राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा एक युवा लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाएं समाप्त करने के आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटा दिया। इन टिप्पणियों में वकील की सेवाओं को लापरवाह और असंतोषजनक बताया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी जांच के की गई ऐसी टिप्पणियां युवा वकील के भविष्य और करियर को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति का फैसला बरकरार रखा।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम (LADCS) के तहत अनुबंध के आधार पर हुई। बाद में यह योजना बंद कर दी गई और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया गया कि मौजूदा अनुबंधों का नवीनीकरण न किया जाए। ऐसे में याचिकाकर्ता की सेवाएं जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता को एलएडीसीएस के तहत दो साल के लिए असिस्टेंट लीगल एंड डिफेंस काउंसिल नियुक्त किया गया था। बाद में उसकी नियुक्ति एक साल के लिए बढ़ा दी गई। इस बीच, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ने एक आदेश जारी कर उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इस आदेश में उसकी सेवाओं को लापरवाह और असंतोषजनक बताते हुए प्रतिकूल टिप्पणियां भी की गईं। ये टिप्पणियां किसी जांच के बिना की गई थीं। याचिकाकर्ता ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ये टिप्पणियां उसकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली हैं और एक युवा वकील होने के नाते उसके भविष्य तथा करियर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। उसका कहना था कि बिना जांच किए इस तरह की टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए थीं।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने दलील दी कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशों के तहत LADCS योजना बंद कर दी गई थी और मौजूदा अनुबंधों का नवीनीकरण नहीं किया जाना था। सरकार ने योजना के खंड 6 का भी हवाला दिया, जो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष की मंजूरी या पूर्व सूचना के बिना किसी भी डिफेंस काउंसिल की सेवाएं समाप्त करने का अधिकार देता है।

दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने और योजना के प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य की दलीलों को आंशिक रूप से स्वीकार किया। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा की गई टिप्पणियां प्रतिकूल और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली थीं।

कोर्ट ने कहा,

“यह निर्विवाद है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा की गई उक्त टिप्पणियां प्रतिकूल प्रकृति की हैं और याचिकाकर्ता जैसे युवा वकील के भविष्य, जीवन और करियर को निश्चित रूप से प्रभावित करेंगी। कानून के प्रावधानों के अनुसार, बिना किसी जांच के याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए थीं।”

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि LADCS योजना बंद कर दी गई, इसलिए याचिकाकर्ता की सेवाएं जारी नहीं रखी जा सकतीं। लेकिन सेवा समाप्ति के आदेश के साथ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां बिना किसी जांच के पारित की गईं, इसलिए उन्हें रद्द कर रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

पीठ ने कहा,

“यह स्पष्ट किया जाता है कि चुनौती दिए गए आदेश में याचिकाकर्ता के खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी को उसके भविष्य के प्रयासों में किसी भी उद्देश्य से उसके विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी नहीं माना जाएगा।”

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।


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