राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जो डॉक्टर अपना नाम बदलकर मेडिकल ऑफिसर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन 2026 (सीधी भर्ती परीक्षा) में शामिल होना चाहता है, उसे सबसे पहले अपने शैक्षणिक दस्तावेजों में अपना नाम ठीक कराना होगा।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता के स्कूल और कॉलेज के रिकॉर्ड में उसका नाम ठीक नहीं हो जाता तब तक उसे वह राहत नहीं दी जा सकती, जिसकी उसने मांग की है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) उसके शैक्षणिक दस्तावेजों में नाम ठीक कर देते हैं तो वह आगे की जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सही दस्तावेज सौंप सकता है।

याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेजों में उसका नाम जय श्री राम दर्ज था। अपनी डिग्री पूरी करने के बाद उसने अपना नाम बदलकर जय गुर्जरबकर लिया, और राजस्थान सरकार ने राजस्थान गजट में इस बदलाव की अधिसूचना भी जारी की।

गजट नोटिफिकेशन के आधार पर उसने अपना नाम ठीक कराने के लिए RUHS और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) से संपर्क किया। इसके बाद RUHS ने SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर को निर्देश दिया कि वह उसका MBBS माइग्रेशन सर्टिफिकेट जय श्री राम उर्फ ​​जय गुर्जर नाम से जारी करें। RMC के पास नाम बदलने के लिए दिए गए उसके आवेदन को भी रजिस्ट्रार द्वारा मंजूर कर लिया गया।

इस स्थिति को देखते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने मांग की कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे उसे जय गुर्जर नाम से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने दें। साथ ही उसने यह भी कहा कि केवल इसलिए उसके आवेदन को खारिज या अमान्य न किया जाए, क्योंकि RMC द्वारा जारी उसके मौजूदा मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर उसका पुराना नाम लिखा है।

याचिका का विरोध करते हुए प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने MBBS कोर्स में उन शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर दाखिला लिया, जिन पर जय श्री राम नाम लिखा था। उन्होंने कहा कि जब तक उसके स्कूल और कॉलेज के रिकॉर्ड में नाम ठीक नहीं हो जाता, तब तक उसके MBBS रिकॉर्ड या मेडिकल रजिस्ट्रेशन में जरूरी बदलाव नहीं किए जा सकते।

कोर्ट ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेजों में उसका नाम ठीक नहीं हो जाता, तब तक उसे मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती। इसमें स्पष्ट किया गया कि उसने किसी भी प्राधिकरण को उन रिकॉर्ड्स में उसका नाम बदलने का निर्देश नहीं दिया था, और प्राधिकरण कानून के अनुसार उसके आवेदनों पर विचार करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया, और उसे यह छूट दी गई कि आवश्यक सुधार करने के बाद वह फिर से संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क कर सकता है।

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