रात में बिना संकेत हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराने पर बाइक सवार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

Update: 2026-05-14 10:31 GMT

गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रात के समय बिना किसी चेतावनी संकेत के हाईवे पर खड़े ट्रक से बाइक टकरा जाने पर बाइक चालक को लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें मृतक बाइक चालक पर 30 प्रतिशत सह-लापरवाही तय की गई थी।

जस्टिस मूल चंद त्यागी ने कहा कि ट्रक चालक ने वाहन को इस तरह खड़ा किया था कि उसका आधा हिस्सा सड़क पर था और बाकी हिस्सा सड़क से बाहर। साथ ही वहां कोई इंडिकेटर, पार्किंग लाइट, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत नहीं लगाया गया, जिससे आने वाले वाहन चालकों को सतर्क किया जा सके।

अदालत ने कहा,

“रात करीब साढ़े सात बजे दुर्घटना हुई। ऐसे में बिना किसी चेतावनी संकेत के सड़क पर खड़े ट्रक को देख पाना मृतक के लिए कठिन था। ट्रक को जिस तरीके से खड़ा किया गया, वह मोटर वाहन अधिनियम की धारा 122 और 126 का गंभीर उल्लंघन था।”

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने ट्रक चालक को गवाही के लिए पेश नहीं किया, ताकि दावेदारों के आरोपों का खंडन किया जा सके। ऐसे में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि दुर्घटना के लिए पूरी तरह ट्रक चालक ही जिम्मेदार था।

मामले में मृतक गोविंदभाई पटेल की पत्नी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के आदेश को चुनौती दी थी। अधिकरण ने पहले आंशिक रूप से दावा स्वीकार करते हुए करीब 5 लाख 96 हजार रुपये मुआवजा और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था।

दुर्घटना उस समय हुई, जब गोविंदभाई पटेल अपनी दोपहिया वाहन से उंझा से महेरवाड़ा की ओर जा रहे थे। सामने से आ रहे वाहनों की तेज हेडलाइट के कारण उन्हें सड़क पर खड़ा ट्रक दिखाई नहीं दिया और उनकी बाइक ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। हादसे में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आईं और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

दावेदार पक्ष ने अदालत में कहा कि ट्रक को बिना किसी संकेत के सड़क पर खड़ा करना पूरी तरह गैरकानूनी था और इसी कारण दुर्घटना हुई। साथ ही ट्रक चालक के खिलाफ FIR और आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था इसलिए उसे ही पूरी तरह जिम्मेदार माना जाना चाहिए था।

वहीं बीमा कंपनी ने दलील दी कि मृतक ने पीछे से खड़े ट्रक को टक्कर मारी, इसलिए वह भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार है।

सभी पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मृतक पर लगाई गई सह-लापरवाही की टिप्पणी रद्द की और मुआवजे की राशि बढ़ाकर 9 लाख 25 हजार 944 रुपये की।

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