दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित डिजिटल नियामक संस्था, ग्रिवेंस अपीलेट कमिटी (GAC), यूजर्स की अपीलों को केवल इसलिए खारिज नहीं कर सकती, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जरूरी जानकारी देने में विफल रहे हैं।

जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि कमिटी के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह निर्देश देने की पर्याप्त शक्तियां हैं कि वे जानकारी दें और स्पष्ट करें कि किसी खास कंटेंट या यूजर के अकाउंट को क्यों हटाया या सस्पेंड किया गया, या यूजर की शिकायत को पहले क्यों खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने कहा,

"इस अदालत की राय में, 'ग्रिवेंस अपीलेट कमिटी' (जो केंद्र सरकार द्वारा 'टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत गठित एक डिजिटल नियामक संस्था है) को यूजर्स की अपीलों को केवल इसलिए खारिज नहीं करना चाहिए, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से कोई जवाब या जानकारी नहीं मिली है।"

कोर्ट ने आगे कहा,

"कमिटी के पास प्लेटफॉर्म को यह निर्देश देने की पर्याप्त शक्तियां हैं कि वे जरूरी जानकारी दें और स्पष्ट करें कि किसी खास कंटेंट या अकाउंट को क्यों हटाया या सस्पेंड किया गया, या यूजर की शिकायत को पहले क्यों खारिज कर दिया गया।"

कोर्ट, प्रकाश कुमार सिंह नाम के एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सिंह ने मेटा प्लेटफॉर्म्स और इंस्टाग्राम द्वारा 2 जून और 9 जून को अपना इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड और डिसेबल किए जाने (और बाद में उसे बहाल न करने) के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।

सिंह ने इस कार्रवाई के खिलाफ ग्रिवेंस अपीलेट कमिटी का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि कमिटी ने 22 सितंबर के एक आदेश के जरिए उनकी शिकायत का निपटारा किया, जिसमें यह कहा गया कि मेटा द्वारा अपनी कार्रवाई के लिए दिए गए स्पष्टीकरण में स्पष्टता की कमी थी।

कोर्ट ने कहा कि ग्रिवेंस अपीलेट कमिटी जो कि इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 'ग्रिवेंस ऑफिसर्स' (शिकायत निवारण अधिकारियों) के फैसलों से असंतुष्ट यूजर्स की अपीलें सुनती है उनके पास प्लेटफॉर्म से जरूरी जानकारी मांगने का अधिकार है।

सुनवाई के दौरान, मेटा के वकील ने कहा कि संबंधित जानकारी दो दिनों के भीतर कमिटी को उपलब्ध करा दी जाएगी।

प्रस्तुत दलीलों को देखते हुए कोर्ट ने ग्रिविएंस अपीलेट कमिटी के समक्ष सिंह की अपील को बहाल कर दिया और कमिटी को निर्देश दिया कि वह मेटा से जरूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद जल्द से जल्द उचित आदेश पारित करे।

कोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया साथ ही सिंह को यह छूट दी कि यदि उनकी कोई शिकायत बाकी रह जाती है, तो वे दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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