दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि राजधानी के प्रत्येक पुलिस जिले में POCSO मामलों की जांच के लिए अलग टीम गठित करने के प्रस्ताव पर उचित कदम उठाएं। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्ताव में दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में फैसला लिया जाए।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने POCSO Act के तहत दर्ज मामलों की जांच में देरी से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में POCSO मामलों की जांच समयसीमा के भीतर पूरी नहीं होने की समस्या उठाई गई।

याचिकाकर्ता जुबेर अली की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि POCSO Act की धारा 35 के तहत विशेष अदालत द्वारा अपराध का संज्ञान लेने के बाद बाल पीड़ित के साक्ष्य को 30 दिनों के भीतर दर्ज किया जाना है। साथ ही, जहां तक संभव हो, संज्ञान लेने की तारीख से एक वर्ष के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 193(2) के तहत POCSO Act की धारा 4, 6, 8 और 10 के तहत आने वाले निर्धारित अपराधों की जांच पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी द्वारा सूचना दर्ज किए जाने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी की जानी जरूरी है।

अदालत को बताया गया कि इसके बावजूद ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें जांच एजेंसियां कानून में निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच पूरी करने में विफल रही हैं। इसी को देखते हुए याचिकाकर्ता ने दिल्ली के प्रत्येक पुलिस जिले में POCSO मामलों की जांच के लिए अलग टीम गठित करने का सुझाव दिया।

जुबेर अली ने सितंबर में दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक अभ्यावेदन भी दिया। इसमें POCSO मामलों की जांच समय पर पूरी करने के लिए अलग जांच टीम गठित करने सहित कई सुझाव दिए गए।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर अभ्यावेदन पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में जरूरी परामर्श तथा अन्य प्रक्रियाएं चल रही हैं।

इस पर पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस याचिकाकर्ता की ओर से उठाई गई समस्याओं से पहले से अवगत है। अदालत ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि अभ्यावेदन में दिए गए सुझावों पर विचार करते हुए उचित कदम उठाए जाएं।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

“हम याचिका का निपटारा करते हुए पुलिस कमिश्नर को निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाएं।”

हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को इस संबंध में तीन महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील से यह भी कहा कि आदेश की जानकारी पुलिस कमिश्नर को तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: