एंटी-CEC प्रदर्शनों के बीच नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, पुलिस के शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 के बॉन्ड संबंधी नोटिस को दी चुनौती
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की छात्र नेता नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, जिसमें उन्हें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का बॉन्ड और एक जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया है। बोरा की कानूनी टीम के मुताबिक, मामले में तत्काल सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष याचिका लगाने की मांग की जा रही है।
नेहा बोरा को शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन्हें मंडी हाउस में विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया और अगले दिन सुबह रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
इस मामले में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी शांति भंग होने की आशंका के आधार पर एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। उन्हें रविवार शाम स्पेशल एग्जीक्यूटिव कोर्ट ने रिहा कर दिया।
ये हिरासत संबंधी कार्रवाइयां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के समूहों के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुईं। इन संगठनों का कहना है कि SIR की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने और उनके मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा है।