दिल्ली की जमीन बेहद सीमित संसाधन: हाईकोर्ट ने 1063 करोड़ की मांग बहाल की, टैक्सदाताओं पर बोझ नहीं डाल सकते
दिल्ली हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को बड़ी राहत देते हुए भारत होटल्स लिमिटेड के खिलाफ 1063 करोड़ से अधिक की लाइसेंस फीस मांग को बहाल किया। अदालत ने कहा कि राजधानी की जमीन बेहद सीमित सार्वजनिक संसाधन है और उससे होने वाले नुकसान का बोझ आम करदाताओं पर नहीं डाला जा सकता।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सिंगल जज के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें 13 फरवरी 2020 की मांग नोटिस और 1982 में किए गए लाइसेंस समझौते की समाप्ति रद्द की गई थी।
यह विवाद NDMC द्वारा भारत होटल्स को 99 वर्षों के लिए दी गई जमीन के लाइसेंस से जुड़ा है। NDMC ने लाइसेंस फीस में संशोधन करते हुए ₹1063 करोड़ से अधिक की मांग की थी। यह कहते हुए कि पहले की फीस जमीन के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाती।
हाईकोर्ट ने कहा,
“नई दिल्ली की जमीन सबसे दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। यदि ऐसे संसाधन से जुड़े लेन-देन में सार्वजनिक राजस्व का भारी नुकसान होता है तो उसका बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने यह भी पाया कि लाइसेंसधारी ने जमीन के उप-लीज से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने NDMC की अपील स्वीकार करते हुए पूर्व आदेश रद्द किया और लाइसेंस फीस की मांग को फिर से प्रभावी किया।