दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में आरोपी नताशा नरवाल की उस याचिका पर सोमवार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अकादमिक सम्मेलन में शामिल होने और शोध कार्य के लिए ब्रिटेन जाने की अनुमति मांगी।

जस्टिस अमित बंसल ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

नताशा नरवाल ने ट्रायल कोर्ट के 6 अक्टूबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा था कि विदेश जाने का अधिकार असीमित नहीं है और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत चल रही कार्यवाही भी इस मामले में प्रासंगिक है।

नताशा ने 2 नवंबर से 1 दिसंबर तक ब्रिटेन जाने की अनुमति मांगी। उन्हें लंदन स्थित स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS), लंदन विश्वविद्यालय में 5 से 8 नवंबर तक आयोजित होने वाले 23वें वार्षिक 'हिस्टोरिकल मैटेरियलिज्म' सम्मेलन में अपना शोधपत्र प्रस्तुत करना है।

उनके शोधपत्र का शीर्षक जेंडर्ड कार्सरल लेबर ऐज सोशल रिप्रोडक्शन है जिसमें लैंगिक दृष्टिकोण से कारावास से जुड़े श्रम और सामाजिक पुनरुत्पादन के विषय पर चर्चा की गई।

ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर विचार होना अभी बाकी है। नताशा के खिलाफ यूएपीए के तहत जिन अपराधों में आरोपपत्र दाखिल किया गया, उनमें आजीवन कारावास और कुछ मामलों में मृत्युदंड तक का प्रावधान है।

ट्रायल कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि किसी आपराधिक मामले का लंबित होना अपने आप में आरोपी को विदेश यात्रा से हमेशा के लिए वंचित नहीं करता। हालांकि, अदालत को मामले की प्रकृति और उससे जुड़ी समग्र परिस्थितियों पर विचार करना आवश्यक है।

मामले की गंभीरता और कार्यवाही के मौजूदा चरण को देखते हुए ट्रायल कोर्ट ने नताशा को विदेश जाने की अनुमति देना उचित नहीं माना था। अब हाईकोर्ट उनकी याचिका पर विचार करेगा और दिल्ली पुलिस का पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्यवाही करेगा।

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