दिल्ली के कनॉट प्लेस में शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके नेता अभिजीत डिपके के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है और कानून के तहत सभी जरूरी उपाय किए जाएंगे।

एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच बृहस्पतिवार 15 अक्टूबर को एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

यह याचिका पालिका बाजार में रेडीमेड कपड़े बेचने वाले लाइसेंसधारी स्ट्रीट वेंडर अनिल कुमार गुप्ता ने दाखिल की। याचिकाकर्ता का कहना है कि कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन से व्यापारियों और कारोबारियों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली पुलिस की ओर से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के पिछले तौर-तरीकों को देखते हुए याचिकाकर्ता की आशंकाएं समझी जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस और आसपास के कारोबार पर असर पड़ने की चिंता है, जहां करीब 15 लाख व्यापारियों की आजीविका जुड़ी हुई है।

अदालत ने अपने आदेश में दर्ज किया कि याचिकाकर्ता को आशंका है कि अभिजीत डिपके के नेतृत्व में होने वाला प्रदर्शन कनॉट प्लेस में व्यावसायिक गतिविधियों को बाधित कर सकता है।

कोर्ट को बताया गया कि CJP को ईमेल के माध्यम से नोटिस दिया जा चुका है। इसके बाद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि पुलिस ने पार्टी की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं और कानून के तहत सभी संभव उपाय किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए तय की।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सचिन पुरी ने कहा कि शुक्रवार का प्रस्तावित प्रदर्शन ऐसे स्थान पर आयोजित करने की घोषणा की गई, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित नहीं किया गया।

उन्होंने दलील दी कि कनॉट प्लेस के बीचोंबीच प्रदर्शन होने से पूरे इलाके में आवाजाही और कारोबार बाधित हो सकता है।

पुरी ने अदालत से आग्रह किया कि प्रदर्शन के कारण लोगों की आवाजाही न रुके और कारोबार ठप होने की स्थिति पैदा न हो।

उन्होंने कहा कि यह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का मामला नहीं, बल्कि कनॉट प्लेस में होने वाले प्रस्तावित मार्च को लेकर है। उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों के व्यस्त सप्ताहांत में कारोबारियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

अभिजीत डिपके ने शुक्रवार को देशव्यापी 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन का आह्वान किया। इसके तहत लोगों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर एकत्र होने की अपील की गई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह कानून के तहत निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना चाहते हैं।

गुप्ता ने याचिका में कहा कि जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास बार-बार होने वाले प्रदर्शनों, बैरिकेडिंग और यातायात में बदलाव के कारण स्ट्रीट वेंडरों, दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई बार उनका कामकाज ठप हो जाता है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के उस निर्देश का भी हवाला दिया गया, जिसमें जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के क्षेत्र में प्रदर्शन, धरना या जमावड़े की अनुमति नहीं देने की बात कही गई।

याचिकाकर्ता ने मांग की कि इस आदेश का पालन कराया जाए और जंतर-मंतर, संसद मार्ग तथा आसपास की सड़कों पर यातायात और पैदल आवाजाही के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। बैरिकेडिंग और मार्ग परिवर्तन केवल उतनी ही सीमा तक हों, जितने आवश्यक हों।

याचिका में नए निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के लिए समयबद्ध तरीके से संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की मांग भी की गई, ताकि वहां होने वाले प्रदर्शन आसपास की सड़कों को बाधित न करें।

इसके अलावा, स्ट्रीट वेंडरों को बेदखल करने या उनका सामान जब्त करने से पहले स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का पालन करने की मांग की गई।

कनॉट प्लेस में प्रदर्शन का आह्वान ऐसे समय किया गया, जब CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दोनों को कथित तौर पर जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश करने, बांड की शर्तों का उल्लंघन करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

हाईकोर्ट ने फिलहाल दिल्ली पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की।

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