दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दो PILs पर केंद्र का रुख जानना चाहा। ये PILs विरोध-प्रदर्शनों को रेगुलेट करने और ट्रैफिक व बिज़नेस में रुकावट रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने की मांग को लेकर दायर की गईं।

इन याचिकाओं का ज़िक्र मंगलवार सुबह एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की डिवीज़न बेंच के सामने किया गया।

एक याचिका एक व्यापारी ने दायर की, जबकि दूसरी वकील ऋषभ सक्सेना ने दायर की।

व्यापारी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सचिन पुरी ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों से बिज़नेस गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने अंतरिम निर्देश देने की मांग की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदर्शन तय जगहों पर हों और प्रोफेशनल्स व बिज़नेस पर असर न पड़े।

जब कोर्ट को बताया गया कि इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं तो जजों ने कहा कि वे ऐसे मुद्दे पर विचार नहीं करना चाहते जो पहले से ही कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने अधिकारियों से अपना रुख रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

सक्सेना अपनी PIL के ज़रिए मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ और अमित साहनी बनाम पुलिस कमिश्नर मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 10/2018 को भी लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें विरोध-प्रदर्शनों को रेगुलेट करने की शर्तें बताई गईं।

याचिका में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की मांग की गई है। इसमें ट्रैफिक पर पड़ने वाले असर का पहले से आकलन, डायवर्जन प्लान, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती और समय पर पब्लिक एडवाइज़री जारी करना शामिल है।

याचिकाकर्ता ने 12 अक्टूबर की एक घटना का भी ज़िक्र किया, जब उन्हें मंडी हाउस गोलचक्कर के पास भीड़ का सामना करना पड़ा था और कथित तौर पर उन्हें लगभग दो घंटे की देरी हुई।

कोर्ट ने देखा कि याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित हैं और याचिकाकर्ताओं की शिकायत मुख्य रूप से उन निर्देशों को लागू करने के बारे में है।

इसलिए कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील को इस मामले में निर्देश लेने के लिए कहा।

ASG ने कहा कि केंद्र अपना रुख और सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई सामग्री रिकॉर्ड पर रखेगा।

अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।

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