बच्चों की संख्या के आधार पर मातृत्व अवकाश रोकने वाले नियम की वैधता जांचेगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 के नियम 43 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। इस नियम के तहत दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारी को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है।
जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ डॉ. गीता रानी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपनी दूसरी गर्भावस्था के दौरान मातृत्व अवकाश देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता ने बताया कि 2024 में पहली गर्भावस्था के दौरान उन्होंने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद दूसरी गर्भावस्था के दौरान उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के नियम 43 का हवाला देते हुए उनका आवेदन खारिज किया।
नियम 43(1) के अनुसार, दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारी को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में जीवित बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान है। इनमें गर्भपात और गर्भसमापन जैसी परिस्थितियां शामिल हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट के के. उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार एवं अन्य मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने से गलत तरीके से इनकार किया गया।
हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि के. उमादेवी मामले के तथ्य मौजूदा मामले से अलग हैं। उस मामले में कर्मचारी के सरकारी सेवा में आने से पहले पहली शादी से दो जैविक बच्चे थे और सरकारी सेवा में आने के बाद वर्तमान विवाह से उनका पहला बच्चा हुआ।
कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से भरोसा किए गए मद्रास हाईकोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एम. आसिया बेगम मामले पर भी विचार किया। उस मामले में कर्मचारी ने जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद तीसरे बच्चे को जन्म दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते समय इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया कि नियम 43 के तहत मातृत्व अवकाश का अधिकार प्रसव की संख्या पर नहीं, बल्कि मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किए जाने के समय जीवित बच्चों की संख्या पर आधारित है।
इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के नियम 43 की वैधता को चुनौती देने के मुद्दे पर अदालत की सहायता के लिए समय मांगा।
मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।