बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के आगामी चुनाव को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति और उनके कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।

याचिका में 25 सितंबर को जारी उस सूचना को चुनौती दी गई, जिसके तहत बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के पदाधिकारियों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए उसके सदस्य प्रतिनिधि के चुनाव की तारीख 10 अक्टूबर तय की गई।

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने वकील महमूद प्राचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

प्राचा ने स्वयं अदालत में पेश होकर याचिका दायर की। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर और सीनियर एडवोकेट राकेश मुंजाल को 26 सितंबर को दी गई मांग के आधार पर बार काउंसिल ऑफ दिल्ली नियम, 1963 के नियम 54 के तहत असाधारण बैठक बुलाने का निर्देश देने की भी मांग की।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुख्य सवाल उस रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकार से जुड़ा है, जिसने चुनाव कार्यक्रम तय करने वाली विवादित सूचना जारी की।

इसी को देखते हुए अदालत ने पक्षकारों को रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति से संबंधित नियुक्ति पत्र और सभी जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

अदालत ने विशेष रूप से रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति की अवधि और उनके कार्यकाल के जारी रहने से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा। पक्षकारों को इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया।

अदालत ने कहा कि पक्षकार तीन दिनों के भीतर अपनी दलीलों का दो पन्नों का संक्षिप्त नोट भी दाखिल करें। इसके साथ उन फैसलों को स्पष्ट रूप से चिन्हित करके पेश करने को कहा गया, जिनके आधार पर वे अपने कानूनी तर्क रखना चाहते हैं। पक्षकार उन अन्य दस्तावेजों को भी रिकॉर्ड पर रख सकेंगे, जिन पर वे भरोसा करना चाहते हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि महमूद प्राचा, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के निर्वाचित सदस्य होने के नाते, कानून के अनुसार चुनाव में अपना नामांकन दाखिल करने के हकदार हैं।

मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। तब तक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति और उनके कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाने हैं।

इसके बाद चुनाव कार्यक्रम जारी करने के उनके अधिकार से जुड़े सवाल पर आगे सुनवाई होगी।

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