20 साल पहले 300 रुपए की रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिश्वत मांगने का कोई सबूत नहीं है।

ये फैसला जस्टिस अभय सिंह ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 

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