इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अपनी विशेष जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के साथ आता है और यह नागरिकों को जिम्मेदारी के बिना बोलने का अधिकार प्रदान नहीं करता है और न ही यह भाषा के हर संभव उपयोग के लिए एक मुक्त लाइसेंस प्रदान करता है।


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