इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिल्ली के वकीलों की जज नियुक्ति पर बार एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

Update: 2026-05-13 08:05 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हाईकोर्ट में दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की जज के रूप में नियुक्ति पर आपत्ति जताई।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में वकालत करने वाले कई वकीलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया। एसोसिएशन ने कहा कि पहले भी ऐसी नियुक्तियां हुई हैं लेकिन भविष्य में इस प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।

पत्र में कहा गया कि जब दिल्ली के वकीलों के नाम जज नियुक्ति के लिए सुझाए जाते है तब कॉलेजियम यह नहीं बताता कि उनके पास ऐसा कौन-सा वस्तुनिष्ठ आधार या सामग्री है, जिसके आधार पर उन वकीलों की सिफारिश की जाती है, जिनकी इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियमित पैरवी या फाइलिंग तक नहीं होती।

बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इलाहाबाद में लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे वकीलों की अक्सर अनदेखी की जाती है।

पत्र में कहा गया,

“जो वकील दिल्ली या अन्य अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे हैं और वहां के कॉलेजियम द्वारा उपयुक्त नहीं माने गए या सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, बड़ी संख्या में ऐसे वकीलों को यहां जज बनाया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि हाईकोर्ट स्तर का कॉलेजियम भी स्वतंत्र निर्णय लेने में कमी दिखा रहा है।”

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि ऐसी नियुक्तियों से भाई-भतीजावाद और पक्षपात की आशंकाएं पैदा होती हैं।

पत्र में कहा गया कि कॉलेजियम प्रणाली का उद्देश्य सबसे योग्य और प्रतिभाशाली लोगों को हाईकोर्ट का जज बनाना था ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे। लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और कई फैसले अपारदर्शी दिखाई देते हैं।

बार एसोसिएशन ने मांग की कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज नियुक्ति के लिए उन अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनकी यहां नियमित फाइलिंग और बहस का अनुभव रहा है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि दिल्ली से नियुक्त होकर आने वाले कई जज इलाहाबाद हाईकोर्ट की परंपराओं से पूरी तरह परिचित नहीं होते।

पत्र में कहा गया,

“ऐसे नियुक्त लोग बाद में उन हाईकोर्ट्स में तबादला चाहने लगते हैं, जहां उनकी जड़ें और परिवार जुड़े होते हैं।”

अंत में बार एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि नई नियुक्तियों से पहले उनकी आपत्तियों और चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

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