प्राइवेट कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने की मांग वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप का मामला नहीं

Update: 2026-08-07 11:09 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में प्राइवेट कोचिंग संस्थानों की व्यवस्था को नियंत्रित करने और कथित रूप से अनियंत्रित एवं फीस आधारित कोचिंग प्रणाली को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज की।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने एडवोकेट नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा स्वयं पेश होकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे खारिज किया। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नोटिस जारी करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने ऐसा करने से इनकार किया।

खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

याचिका में दावा किया गया कि प्राइवेट कोचिंग व्यवस्था के कारण देशभर में स्टूडेंट्स के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की वर्ष 2024 की कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम संबंधी गाइडलाइन और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्टों का हवाला दिया था।

याचिका में विशेष रूप से कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों में स्टूडेंट्स पर बढ़ते दबाव और आत्महत्या की घटनाओं का मुद्दा उठाया गया था। इसमें डमी स्कूलों के बढ़ते चलन पर भी चिंता जताई गई।

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि JEE, NEET, CLAT, CUET जैसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली को राज्यों द्वारा निर्धारित स्कूल पाठ्यक्रम के अनुरूप बनाया जाए, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव कम हो सके।

याचिका में निजी कोचिंग संस्थानों के लिए एक समान राष्ट्रीय कानूनी ढांचा बनाने की मांग की गई थी। इसमें स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए प्रतिदिन कोचिंग घंटे की सीमा तय करने, प्रत्येक कोचिंग संस्थान में प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बाल परामर्शदाता नियुक्त करने तथा छात्रों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी शिक्षण पद्धतियों पर रोक लगाने की मांग शामिल थी।

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