स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं, आप अंडों से क्यों डरती हैं? : सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी की मांग पर सुनवाई से किया इनकार

Update: 2026-08-07 09:59 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, जिसमें उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले की जांच के दौरान पुलिस के समक्ष ऑनलाइन माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका वापस ले ली गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि जांच का सामना करना होगा और व्यक्तिगत रूप से जांच में सहयोग करना पड़ेगा।

सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि उनकी मुवक्किल को जांच में शामिल होने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जाए।

इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,

"क्या सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?"

सीनियर एडवोकेट ने दलील दी कि पहले महुआ मोइत्रा पर अंडे फेंके जाने की घटनाएं हो चुकी हैं और यदि वह व्यक्तिगत रूप से पेश होती हैं तो ऐसी घटना दोबारा हो सकती है।

इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा,

"राजनीति में आने का फैसला किया है तो अंडों से क्यों डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाईं।"

इसके बाद महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने महुआ मोइत्रा को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। हालांकि, साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने और 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश भी दिया था।

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