गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप पर राहुल गांधी के खिलाफ अर्जी सुनने को तैयार सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को उस अर्जी पर सुनवाई करने की सहमति दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन महीने की गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया था। उस दिन राहुल गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता भारतीय चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष इस अर्जी का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि यह अर्जी अधिवक्ता दिगंत मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में लगाई गई। इस याचिका में अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई।
इससे एक दिन पहले दिल्ली में प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने कथित घटना का जिक्र किया। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह केवल मौखिक दलील के आधार पर किसी घटना का संज्ञान नहीं ले सकती।
चीफ जस्टिस ने उनसे इस संबंध में औपचारिक अर्जी दाखिल करने को कहा था ताकि मामले की जांच की जा सके।
बुधवार को सुनवाई के दौरान भाटिया ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार को धक्का दिया, जो उस समय गर्भवती थीं।
उन्होंने कहा कि इस घटना से जुड़ी एक रिपोर्ट उनके पास है और अदालत को इसका भी संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला पत्रकार राहुल गांधी के खिलाफ खबरें कर रही थीं, इसलिए उनके साथ कथित घटना को लेकर चुनिंदा तरीके से विरोध जताया जा रहा है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि अदालत केवल मौखिक दलील के आधार पर स्वतः संज्ञान नहीं लेगी और संबंधित पक्ष को औपचारिक याचिका दाखिल करनी होगी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अर्जी पर सुनवाई करने की सहमति दी।