भारत में बीबीसी के संचालन पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर, हिंदू सेना के अध्यक्ष ने दायर की याचिका

Update: 2023-02-02 02:36 GMT

भारत में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन और बीबीसी इंडिया के संचालन से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई है।

एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से दायर याचिका में एनआईए को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वो भारत विरोधी और भारत सरकार विरोधी रिपोर्टिंग/डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले पत्रकार सहित शॉर्ट फिल्म के खिलाफ जांच करें।

दरअसल, 2002 के गोधरा दंगों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने बैन लगा दिया। बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।

इसके बाद हिंदू सेना के अध्यक्ष, विष्णु गुप्ता और बीरेंद्र कुमार सिंह ने बीबीसी के संचालन पर बैन लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि बीबीसी अपना एजेंडा चला रही है।

आगे कहा गया है कि बीबीसी द्वारा भारत में व्याप्त शांति और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित किया जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है,

“प्रधानमंत्री के नेतृत्व में साल 2014 के बाद से भारतीय समग्र विकास में तेजी आई है। नरेंद्र मोदी, भारत विरोधी लॉबी, मीडिया खासकर बीबीसी को हजम नहीं हो रहे हैं। इसलिए, बीबीसी भारत और भारत सरकार के खिलाफ पक्षपाती रहा है।"

बीबीसी द्वारा प्रकाशित विभिन्न न्यूज आर्टिकल्स का उल्लेख करते हुए यह आरोप लगाया गया है कि बीबीसी भारत विरोधी और भारत सरकार विरोधी प्रचार का काम कर रहा है।

ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ताओं ने 27.01.2023 को गृह मंत्रालय को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था जिसमें बीबीसी पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, उसके बाद से केंद्रीय मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

डॉक्यूमेंट्री, द मोदी क्वेश्चन के संबंध में, याचिका में कहा गया है,

"डॉक्यूमेंट्री का पहला भाग 2002 में गुजरात में हुई हिंसा पर आधारित है, जो अयोध्या से लौटते समय 59 हिंदू कारसेवकों को गोधरा रेलवे स्टेशन पर जिंदा जला दिए जाने के बाद शुरू हुई थी। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2022 के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए डॉक्यूमेंट्री को उचित रूप से ब्लॉक कर दिया है।”

यह एसआईटी जांच का समर्थन करने वाले 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी निर्भर करता है, जिसने गुजरात दंगों में राज्य के अधिकारियों द्वारा बड़ी साजिश को खारिज कर दिया था।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत संबंधित राहत की मांग की गई है, जो केंद्र सरकार या इसके किसी भी अधिकारी को विशेष रूप से प्राधिकृत किसी भी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए अधिकृत करती है।

तर्क दिया गया है कि ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के अनुच्छेद 19 के तहत अधिकारों पर 'उचित प्रतिबंध' लगाए जाने चाहिए, क्योंकि इसने असामंजस्य को पैदा करने का प्रयास किया है।

सुप्रीम कोर्ट दो अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें डॉक्यूमेंट्री को बैन करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है।



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