लखनऊ में अवैध वकील चैंबर हटेंगे: हाइकोर्ट का सख्त आदेश, बिना नोटिस भी हो सकती है कार्रवाई
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने लखनऊ स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय (पुराना हाइकोर्ट परिसर) के आसपास वकीलों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक भूमि, फुटपाथ या सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए पहले से नोटिस देना अनिवार्य नहीं है।
अदालत ने कहा,
“कानून का शासन बनाए रखने के लिए ऐसे अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाना चाहिए।”
हालांकि लखनऊ नगर निगम ने यह कहा कि अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस देना होगा, इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन व पुलिस की मदद ली जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि अतिक्रमणकारियों को नोटिस नहीं मिल पाता है तो उसे संबंधित स्थान पर चस्पा किया जाए और स्थानीय हिंदी व अंग्रेजी समाचार पत्रों में प्रकाशित भी कराया जाए।
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में 72 अवैध अतिक्रमण पाए गए, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और कुछ दुकानों का निर्माण शामिल है।
यह मामला उस याचिका के दौरान सामने आया जिसमें याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि एक वकील द्वारा बनाया गया अवैध चैंबर उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा बन रहा है और वहां असामाजिक गतिविधियां हो रही हैं।
हाइकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह उठाए गए कदमों की जानकारी अगली सुनवाई, 7 अप्रैल तक हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करे।