वायु प्रदूषण मामले में लार्सन एंड टूब्रो के निदेशकों के खिलाफ जारी समन इलाहाबाद हाइकोर्ट ने रद्द किए
Amir Ahmad
22 Jan 2026 5:07 PM IST

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दर्ज एक आपराधिक मामले में लार्सन एंड टूब्रो कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ जारी समन रद्द किया।
कोर्ट ने कहा कि समन जारी करते समय संबंधित मजिस्ट्रेट ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों पर समुचित रूप से विचार नहीं किया और बिना सही तथ्यात्मक आधार के आदेश पारित कर दिया।
यह आदेश जस्टिस बृज राज सिंह द्वारा पारित किया गया।
मामले का पूरा विवरण
इस मामले में लार्सन एंड टूब्रो के पूर्णकालिक निदेशक एवं वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य वित्त अधिकारी, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा स्वतंत्र निदेशक शामिल थे।
इन सभी को लखनऊ में तैनात विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा वायु अधिनियम की धारा 37 के अंतर्गत समन जारी किया गया।
वायु अधिनियम की धारा 37 के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना इकाई संचालन, निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना करने पर दंड का प्रावधान है।
परियोजना और कंपनी का पक्ष
वर्ष 2018 में लार्सन एंड टूब्रो को ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत खुर्जा–पिलखनी खंड में विभिन्न निर्माण कार्यों का ठेका प्रदान किया गया। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए गाजियाबाद में एक बैचिंग प्लांट स्थापित किया गया।
आवेदकों का कहना था कि वायु अधिनियम की धारा 21 और 22 के तहत सभी आवश्यक शर्तों का पालन किया गया और वायु अधिनियम तथा जल अधिनियम, दोनों के अंतर्गत आवश्यक अनुमतियां विधिवत रूप से प्राप्त की गई।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से यह दावा किया गया कि 14 दिसंबर, 2020 को बैचिंग प्लांट का निरीक्षण किया गया और निरीक्षण के दौरान कुछ उल्लंघन पाए गए। हालांकि, लार्सन एंड टूब्रो की ओर से यह तर्क दिया गया कि निरीक्षण रिपोर्ट मौके पर तैयार नहीं की गई, बल्कि बाद में बनाई गई और न तो कंपनी को और न ही संबंधित अधिकारियों को कभी सौंपी गई।
यह भी दलील दी गई कि उसी दिन नोएडा में इसी तरह की एक अन्य परियोजना के बैचिंग प्लांट का निरीक्षण भी किया गया, जिसकी निरीक्षण रिपोर्ट भी बाद में तैयार की गई।
कंपनी ने यह भी बताया कि जिस बैचिंग प्लांट को लेकर मामला दर्ज किया गया, उसे अब पूरी तरह से हटा दिया गया, परिसर खाली कर दिया गया और संबंधित परियोजना वर्ष 2024 में पूरी हो चुकी है।
आवेदकों ने यह भी कहा कि उन्हें समन और आपराधिक कार्यवाही की जानकारी हाल ही में मिली, जिसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 में पारित समन आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी।
हाइकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बैचिंग प्लांट के संचालन के लिए दी गई सहमति एक अगस्त, 2020 से इकतीस जुलाई 2022 तक वैध थी। इसी अवधि के दौरान निरीक्षण किया गया।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि समन आदेश में मजिस्ट्रेट ने यह दर्ज किया कि कंपनी बिना पूर्व अनुमति के इकाई चला रही थी, जबकि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज इस तथ्य का खंडन करते हैं।
जस्टिस बृज राज सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा यह कहना कि उन्होंने दस्तावेज देख लिए हैं, पर्याप्त नहीं है। समन जारी करने से पहले यह आवश्यक था कि सभी दस्तावेजों पर विधिवत रूप से विचार किया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन जारी करने का आधार तथ्यात्मक रूप से गलत और विधिसम्मत नहीं है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने लार्सन एंड टूब्रो और उसके निदेशकों के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही मामला पुनः विचार के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट को वापस भेज दिया गया ताकि सभी दस्तावेजों पर समुचित रूप से विचार कर कानून के अनुसार नया आदेश पारित किया जा सके।

