पासपोर्ट मिलने से विदेश जाने का स्वतः अधिकार नहीं, पुलिस कोर्ट से पासपोर्ट सरेंडर कराने की मांग कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
21 Sept 2026 12:23 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के पास पासपोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि उसे विदेश जाने का स्वतः अधिकार मिल जाता है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उसके विदेश जाने की आशंका है तो पुलिस या अभियोजन एजेंसी अदालत का रुख कर पासपोर्ट जमा कराने की मांग कर सकती है, ताकि उसे देश छोड़ने से रोका जा सके।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि पासपोर्ट मिलना अपने आप में दूसरे देश की सीमा पार करने का अधिकार नहीं देता। विदेश यात्रा के लिए संबंधित देश का वीजा और आव्रजन प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है।
कोर्ट ने कहा,
“पासपोर्ट जारी होना धारक को सीमाओं के पार स्वतः जाने का अधिकार नहीं देता। यदि पासपोर्ट धारक विदेश जाने का प्रयास कर रहा है तो पुलिस या संबंधित अभियोजन एजेंसी अदालत का रुख कर पासपोर्ट जमा कराने की मांग कर सकती है, ताकि उसे भारत छोड़ने से रोका जा सके।”
मामले में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए कहा कि उसके खिलाफ दो आपराधिक मामले लंबित होने के कारण पासपोर्ट जारी करने के उसके आवेदन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। उसने अदालत से पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने की मांग की।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले में आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे व्यक्ति को विदेश जाने से रोकना जरूरी नहीं है। अदालत परिस्थितियों के अनुसार अनुमति दे सकती है और उस पर उचित शर्तें लगा सकती है। विदेश यात्रा का सवाल उस समय उठता है, जब संबंधित व्यक्ति वास्तव में विदेश जाने का प्रयास कर रहा हो, जबकि पासपोर्ट जारी करना उससे अलग चरण है।
कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मामले के लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट कानून के तहत नागरिक को मिलने वाला मूल रूप से एक नागरिक दस्तावेज है और केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट अधिकारी उसे जारी करने से इनकार नहीं कर सकते। हालांकि, यदि आवेदक पासपोर्ट आवेदन में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाता है, तो स्थिति अलग होगी।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले महेश कुमार अग्रवाल बनाम भारत संघ का भी उल्लेख किया। इसके आधार पर कोर्ट ने लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को याचिकाकर्ता के पासपोर्ट आवेदन पर विचार करने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया।
मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी।

