वैवाहिक विवाद से जुड़े मामूली आपराधिक मामले के आधार पर नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Amir Ahmad

6 April 2026 5:59 PM IST

  • वैवाहिक विवाद से जुड़े मामूली आपराधिक मामले के आधार पर नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि केवल वैवाहिक विवाद से जुड़े आपराधिक मामले के लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने स्पष्ट किया कि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों वाले ऐसे मामलों को नियुक्ति से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

    अदालत ने कहा,

    “वैवाहिक विवाद से उत्पन्न सामान्य आरोपों पर आधारित आपराधिक मामले का लंबित होना याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने से इनकार करने का वैध आधार नहीं है।”

    मामले में याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के तहत जूनियर असिस्टेंट पद के लिए आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया में सफल होने के बाद उसे गन्ना एवं चीनी आयुक्त विभाग में नियुक्ति आवंटित की गई।

    याचिकाकर्ता ने अपने चरित्र सत्यापन प्रपत्र में पहले से ही यह जानकारी दी कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (CrPC) की धाराओं 498-ए, 323, 504, 506 तथा दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला लंबित है, जो उसके भाई और भाभी के बीच वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। इस मामले में उसका भाई मुख्य आरोपी है, जबकि याचिकाकर्ता सह-आरोपी है।

    इसके बावजूद केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर उसकी नियुक्ति रोक दी गई।

    हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि अभ्यर्थी ने ईमानदारी से आपराधिक मामले की जानकारी दी और मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है तो नियोक्ता परिस्थितियों के अनुसार उसे नियुक्त कर सकता है।

    अदालत ने यह भी कहा कि युवा अवस्था की छोटी गलतियों या पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों के कारण किसी व्यक्ति को जीवनभर अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

    अंततः अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। हालांकि, यह नियुक्ति आपराधिक मुकदमे के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।

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