मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगी

Amir Ahmad

5 May 2026 11:34 AM IST

  • मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगी

    मथुरा में धार्मिक अवसरों पर लगातार सामने आ रही भगदड़ जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से पूछा कि क्या शहर में भीड़ और आपदा प्रबंधन के लिए कोई समग्र योजना मौजूद है

    जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने प्रशासन से यह भी पूछा कि भीड़जनित आपदाओं से निपटने के लिए कौन-सी रणनीतियां, प्रबंधन सिद्धांत और प्रशिक्षण व्यवस्थाएं लागू हैं तथा संबंधित पक्षों को जागरूक करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    मामले की सुनवाई स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा दायर याचिका पर हो रही थी, जिसमें मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया गया।

    याचिकाकर्ता का कहना था कि अवैध निर्माण के आरोप में 23 संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश पारित हुए, लेकिन कार्रवाई केवल कुछ लोगों, विशेषकर याचिकाकर्ता, के विरुद्ध की गई।

    हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को अंतिम अवसर देते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और पूछा कि 23 संपत्तियों के विरुद्ध पारित ध्वस्तीकरण आदेशों पर क्या कार्रवाई हुई, पिछले पांच वर्षों में कितनी संपत्तियों को अवैध निर्माण के लिए चिन्हित किया गया तथा अवैध निर्माण रोकने के लिए क्या नीतिगत और प्रशासनिक व्यवस्था है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है विशेषकर ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों पर।

    अदालत ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण ऐसी परिस्थितियों में बचाव और राहत कार्यों में बाधा बनते हैं और स्थिति को और गंभीर करते हैं।

    इसी के मद्देनजर हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट से पूछा कि जिले में क्या कोई विशेषज्ञ निकाय मौजूद है जो भीड़ के व्यवहार को समझने, विभिन्न एजेंसियों के समन्वय तथा प्रभावी भीड़ प्रबंधन की पद्धतियों पर काम करता हो।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हालिया भगदड़ जैसी घटनाओं पर यदि कोई वैज्ञानिक अध्ययन, शैक्षणिक शोध या संस्थागत विश्लेषण हुआ है तो उसका पूरा विवरण, निष्कर्ष और सिफारिशें रिकॉर्ड पर लाई जाएं।

    नगर आयुक्त और सीनियर पुलिस अधीक्षक को भी यह बताने का निर्देश दिया गया कि शहर को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को नए मामले के रूप में की जाएगी।

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