पेपर लीक होने पर परीक्षा पूरी कराने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश
Amir Ahmad
23 March 2026 12:29 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी परीक्षा में पेपर लीक हो जाए और उससे अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की आशंका हो तो उम्मीदवार राज्य को परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि चयन का कोई अटूट अधिकार नहीं होता और यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ जाए तो उसे रद्द करना उचित है।
कोर्ट ने कहा,
“परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति में इससे समझौता नहीं किया जा सकता।”
मामला उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापक के 910 पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा से जुड़ा था।
याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में भाग लिया और दावा किया कि वे मेरिट सूची में शामिल थे। लेकिन पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद FIR दर्ज हुई और जांच के बाद परिणाम रद्द कर पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी कि केवल 19 अभ्यर्थियों को ही सीधे तौर पर लाभ मिलने की बात सामने आई है, इसलिए पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है।
कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं माना जा सकता।
अदालत ने माना कि पेपर लीक एक व्यापक अनियमितता का संकेत है और इससे अन्य अभ्यर्थियों को भी लाभ मिला हो सकता है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में संभावना के आधार पर भी निर्णय लिया जा सकता है और यह जरूरी नहीं कि हर गड़बड़ी को संदेह से परे साबित किया जाए।
कोर्ट ने यह भी पाया कि मामले में गंभीर अपराधों के तहत आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं और रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रश्नपत्र लीक कर बेचे गए।
इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय सही है, क्योंकि परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हो चुकी थी।
अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और साफ किया कि निष्पक्षता बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

