वकील मुवक्किल का केवल मुखपत्र नहीं, निरर्थक मामलों से बचना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Amir Ahmad

22 Jan 2026 4:56 PM IST

  • वकील मुवक्किल का केवल मुखपत्र नहीं, निरर्थक मामलों से बचना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी वकील अपने मुवक्किल का केवल मुखपत्र नहीं होता और उसे ऐसे निरर्थक मामलों को स्वीकार करने से बचना चाहिए, जिनसे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है।

    हालांकि, कोर्ट ने एक युवा वकील पर लागत (कॉस्ट) लगाने से परहेज किया, क्योंकि उनका नामांकन हाल ही में वर्ष 2024 में हुआ था।

    यह टिप्पणी जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने की।

    जस्टिस विद्यार्थी ने कहा,

    “वकील को यह समझना चाहिए कि वह भले ही अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करता हो, लेकिन वह उसका मात्र मुखपत्र नहीं है। यदि मुवक्किल किसी निरर्थक याचिका को दाखिल करने या तर्क रखने पर जोर देता है, तो वकील का दायित्व है कि वह उसे ऐसा न करने की सलाह दे और स्वयं भी ऐसे निरर्थक ब्रीफ को स्वीकार न करे।”

    मामले की पृष्ठभूमि

    यह मामला ऋण वसूली अधिकरण (DRT) के रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक नोटिस से जुड़ा था, जिसमें विपक्षी पक्ष को यह बताने के लिए कहा गया कि प्रतिभूतिकरण आवेदन क्यों न स्वीकार कर लिया जाए या फिर उसे एकतरफा (एक्स-पार्टी) सुनकर निस्तारित क्यों न किया जाए।

    याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दलील दी कि इस तरह का नोटिस जारी करना केवल DRT के पीठासीन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है और रजिस्ट्रार ऐसा नहीं कर सकता।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी

    हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर ध्यान दिलाया कि याचिका 18 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई, जबकि DRT में यह मामला पहले ही 1 दिसंबर, 2025 को पीठासीन अधिकारी के समक्ष सूचीबद्ध हो चुका था।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे याचिकाकर्ता को कोई पूर्वाग्रह नहीं हुआ है।

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को यह सुझाव भी दिया कि वह हाईकोर्ट में याचिका आगे बढ़ाने के बजाय DRT के समक्ष ही अपनी आपत्ति रखें। इसके बावजूद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका पर बहस करने पर जोर दिया।

    याचिका खारिज

    हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि DRT के रजिस्ट्रार को विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करने का अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने बार और बेंच के संबंधों पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

    कोर्ट ने कहा,

    “कहा जाता है कि बार और बेंच एक ही रथ के दो पहिए हैं। रथ के तेज और सुचारु संचालन के लिए जरूरी है कि दोनों पहिए समान गति से आगे बढ़ें और पहियों का एक समूह दूसरे पहिए पर ब्रेक लगाने का प्रयास न करे।”

    इसी के साथ याचिका को खारिज कर दिया गया।

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