अंतरधार्मिक जोड़े को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाह नोटिस के प्रकाशन से दी छूट; पुलिस सुरक्षा का निर्देश

  • अंतरधार्मिक जोड़े को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाह नोटिस के प्रकाशन से दी छूट; पुलिस सुरक्षा का निर्देश

    परिवार के सदस्यों से जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरा झेल रहे अंतरधार्मिक जोड़े को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह की सूचना प्रकाशित करने और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया से छूट दी।

    अदालत ने लखनऊ के विवाह अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जोड़े के विवाह की सूचना प्रकाशित न करें और प्रस्तावित विवाह पर आपत्तियां भी स्वीकार न करें। साथ ही, लखनऊ के पुलिस आयुक्त को कानून के अनुसार खतरे का आकलन कर जोड़े को सुरक्षा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

    जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने मंगलवार को वयस्क जोड़े की याचिका पर यह आदेश दिया। दोनों करीब दो वर्षों से साथ रह रहे हैं और उनका लगभग नौ महीने का एक बच्चा भी है। अलग-अलग धर्मों से होने के कारण दोनों विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी करना चाहते हैं।

    याचिका में जोड़े ने आशंका जताई कि उनके रिश्ते का विरोध कर रहे माता-पिता और रिश्तेदार उनकी जान को खतरा पहुंचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि डर के कारण उन्हें कई बार अपना निवास स्थान बदलना पड़ा और वे लखनऊ में विवाह करना चाहते हैं।

    हाईकोर्ट ने इस मामले में 26 जून 2025 को लखनऊ के पीजीआई थाने में दर्ज FIR का भी संज्ञान लिया। यह FIR याचिकाकर्ता संख्या एक की मां की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(1) के तहत दर्ज की गई थी। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में दोनों याचिकाकर्ताओं के वयस्क होने और साथ रहने की पुष्टि की गई।

    विवाह की सूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया से छूट

    हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करते हुए कहा कि धारा 5 के तहत विवाह करने के इच्छुक पक्षों को संबंधित विवाह अधिकारी के समक्ष लिखित सूचना देनी होती है। इसके लिए जरूरी है कि उनमें से कम से कम एक व्यक्ति ने सूचना देने से ठीक पहले संबंधित जिले में कम से कम 30 दिन निवास किया हो।

    अधिनियम की धारा 6 विवाह की सूचना के प्रकाशन और धारा 7 उसके प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर निर्धारित आधारों पर आपत्तियां दर्ज कराने से संबंधित है।

    अदालत ने जोड़े को आदेश की तारीख से 10 दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में लखनऊ के विवाह अधिकारी को विवाह की सूचना देने का निर्देश दिया। विवाह अधिकारी को कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करने और विधि सम्मत तरीके से विवाह संपन्न होने के बाद विवाह प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया।

    खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें अधिनियम की धारा 6 और 7 को धारा 46 के साथ पढ़ते हुए सूचना के प्रकाशन और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया को निर्देशात्मक प्रकृति का माना गया। उस फैसले के अनुसार, इस प्रक्रिया का पालन तभी किया जाना चाहिए, जब संबंधित पक्ष इसकी मांग करें।

    जोड़े की परिस्थितियों और उनकी जान-माल की सुरक्षा को लेकर जताई गई आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट ने विवाह की सूचना प्रकाशित करने और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनिवार्यता से छूट दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह अधिकारी दोनों की पहचान, उम्र और विवाह के लिए वैध सहमति की पुष्टि कर सकता है।

    जीवनसाथी चुनने का अधिकार मौलिक स्वतंत्रता का हिस्सा

    हाईकोर्ट ने जोड़े की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए लखनऊ के पुलिस आयुक्त को आवश्यक संरक्षण देने का निर्देश दिया। पुलिस को विवाह से पहले की अवधि और विवाह के बाद भी कानून के अनुसार खतरे का आकलन करते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की हानि होने पर याचिकाकर्ता पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

    अपने आदेश में खंडपीठ ने वयस्क व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की संवैधानिक स्वतंत्रता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना संवैधानिक अदालतों का दायित्व है।

    हाईकोर्ट ने टिप्पणी की,

    “किसी व्यक्ति के धर्म के बावजूद अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। न तो राज्य, न कानून और न ही समाज जीवनसाथी चुनने के अधिकार को निर्धारित कर सकता है।”

    अदालत ने कहा कि इस अधिकार को केवल ऐसे कानून के माध्यम से सीमित किया जा सकता है, जो सार और प्रक्रिया, दोनों दृष्टियों से निष्पक्ष, न्यायसंगत और उचित हो।

    इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।

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