अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील नहीं होगी, जब तक अदालत ने अधिकार क्षेत्र न लांघा हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Amir Ahmad

6 May 2026 12:57 PM IST

  • अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील नहीं होगी, जब तक अदालत ने अधिकार क्षेत्र न लांघा हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि अवमानना अदालत द्वारा कार्यवाही शुरू करने से इनकार किए जाने के आदेश के खिलाफ विशेष अपील अथवा इंट्रा-कोर्ट अपील दाखिल नहीं की जा सकती, जब तक यह न दिखाया जाए कि अवमानना अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए पक्षकारों के अधिकारों या मूल विवाद के गुण-दोष पर फैसला दे दिया।

    जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि यदि अवमानना अदालत बिना मूल विवाद के गुण-दोष में गए केवल कार्यवाही प्रारंभ करने से इनकार करती है, तो उसके आदेश के विरुद्ध विशेष अपील सुनवाई योग्य नहीं होती।

    खंडपीठ ने कहा,

    “विशेष अपील तभी ग्राह्य होगी जब सिंगल बेंच ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मूल आदेश के गुण-दोष पर निर्णय दिया हो। यदि अवमानना अदालत ने विवाद के मेरिट में गए बिना कार्यवाही शुरू करने से इनकार किया है, तो उसके विरुद्ध विशेष अपील नहीं बनती।”

    मामला पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद से जुड़ा था। पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति और उसके परिवार के खिलाफ मामला दायर किया तथा अपनी आय और संपत्ति संबंधी हलफनामे में विवरण 'उपलब्ध नहीं' बताते हुए अंतरिम भरण-पोषण का एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया था।

    पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने झूठा हलफनामा दाखिल किया और इसके खिलाफ उसने एक ओर दंड प्रक्रिया संबंधी प्रावधान के तहत कार्यवाही शुरू की, वहीं अवमानना याचिका भी दायर की।

    सिंगल बेंच ने अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से इनकार करते हुए पति को उपलब्ध वैकल्पिक वैधानिक उपाय अपनाने की छूट दी और कहा कि समान मुद्दे पर समानांतर कार्यवाही से बचा जाना चाहिए।

    इस आदेश को पति ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच ने केवल बहुस्तरीय कार्यवाही से बचने के लिए अवमानना याचिका पर विचार नहीं किया और मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसलिए यह आदेश अपील योग्य नहीं है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि अवमानना अदालत का क्षेत्राधिकार केवल यह तय करने तक सीमित है कि अवमानना हुई या नहीं तथा आवश्यक होने पर दंड देना। मूल विवाद का निर्णय करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि अवमानना याचिका खारिज करने का आदेश पक्षकारों के अधिकारों का निर्धारण नहीं करता और उसके खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील स्वीकार्य नहीं है।

    Next Story