सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने पर CJP एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
Amir Ahmad
29 Sept 2026 4:40 PM IST

फर्रुखाबाद के सरकारी प्राथमिक स्कूल की कथित बदहाल स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य गौरव भारती की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा।
जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार की याचिका पर यह आदेश दिया। सभी प्रतिवादी पक्षकारों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया गया।
याचिका में 19 अगस्त को दर्ज FIR को चुनौती दी गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और 353 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66 लगाई गईं। याचिकाकर्ता ने FIR रद्द करने के साथ गिरफ्तारी और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही पर रोक की मांग की।
याचिका के मुताबिक मामला 16 अगस्त 2026 का है। आरोप है कि गौरव भारती फर्रुखाबाद के करनपुर मजरा बसमल स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय पहुंचे और स्कूल की स्थिति का वीडियो बनाया। याचिका में कहा गया कि उस दिन स्कूल बंद था और वीडियो में भवन की कथित जर्जर एवं अनुपयोगी स्थिति दिखाई गई। वीडियो में संरचना पर क्रॉस का निशान भी दिखाए जाने का उल्लेख है।
याचिका के अनुसार वीडियो में स्कूल परिसर में पानी जमा होने और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की बात कही गई। इसी वजह से बच्चों को छुट्टी दिए जाने का भी दावा किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वीडियो सार्वजनिक शिक्षा संस्थान की स्थिति और बच्चों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे को सामने लाने के लिए बनाया और शेयर किया गया। उसका दावा है कि यह काम जनहित में और सद्भावना से किया गया, लेकिन बाद में उसके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई।
पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने संस्थान का कथित रूप से अवैध वीडियो बनाया और उसकी स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। FIR में यह भी आरोप है कि वह एक अज्ञात व्यक्ति के साथ स्कूल पहुंचा और शिक्षकों से "अनर्गल बातें" की गईं। शिकायत के बाद 19 अगस्त को FIR दर्ज की गई।
याचिका में इन आरोपों पर भी सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि FIR में कथित आपत्तिजनक शब्दों को दर्ज नहीं किया गया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि वे शब्द किस व्यक्ति से कहे गए तथा उनसे जानबूझकर अपमान करने की मंशा कैसे बनती है। याचिका के अनुसार, FIR में मारपीट, आपराधिक बल, धमकी या किसी अन्य हिंसक कृत्य का आरोप भी नहीं है।
IT Act की धारा 66 लगाए जाने को भी याचिका में चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि FIR में कंप्यूटर संबंधी किसी ऐसे कृत्य का आरोप नहीं है, जो इस धारा के तहत अपराध बनता हो। केवल किसी सरकारी स्कूल के भवन का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना, याचिका के अनुसार, इस धारा को लागू करने का आधार नहीं हो सकता।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 लगाए जाने पर भी याचिका में आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि FIR में ऐसे तथ्य नहीं हैं, जिनसे इस धारा के तहत आवश्यक कानूनी तत्व पूरे होते हों। याचिका में कहा गया कि FIR में केवल स्कूल की छवि खराब होने की बात कही गई, जबकि कानून में निर्धारित अन्य आवश्यक परिस्थितियों का उल्लेख नहीं है।
धारा 352 के संबंध में भी याचिकाकर्ता ने कहा कि FIR में केवल "अनर्गल बातें" कहे जाने का सामान्य आरोप है। कथित शब्दों को दर्ज नहीं किया गया और न ही यह बताया गया कि उनसे सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई अपराध करने के लिए उकसाने की आवश्यक मंशा या जानकारी कैसे स्थापित होती है।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक संस्थानों की स्थिति और बच्चों की शिक्षा एवं सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर जानकारी और विचार सामने रखना जनहित से जुड़ा विषय है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े फैसलों का भी हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील शाश्वत आनंद, रत्ना सिंह और सौमित्र आनंद ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि जब FIR में लगाए गए अपराधों के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया मौजूद नहीं हैं, तब आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के समान होगा।
हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा। मामले में आगे की सुनवाई जवाबी हलफनामे दाखिल होने के बाद होगी।

