लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जे भी हटेंगे, हाईकोर्ट ने पांच हफ्ते में कार्रवाई के दिए निर्देश
Amir Ahmad
12 Sept 2026 1:00 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सेशन कोर्ट के आसपास बचे सभी अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि उसके पहले के आदेशों के अनुपालन में 57 और अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। इससे पहले 14 अवैध निर्माण हटाए गए।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट परिसर तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में कथित अवैध कब्जों से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
लखनऊ नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने 8 सितंबर 2026 के निर्देशों के साथ हटाए गए कब्जों की तस्वीरें भी कोर्ट के सामने पेश कीं। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई।
पीठ ने कहा कि 7 अप्रैल 2026 के आदेश के पैरा-9 में जिन अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश दिया गया, उनमें से सभी अवैध कब्जे हटाए जाने हैं।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कार्रवाई के दौरान 4 अगस्त के आदेश में तय की गई सावधानियों का पालन किया जाए।
72 कब्जेदारों को दिया गया अंतिम मौका
हाईकोर्ट ने 4 अगस्त के अपने आदेश में बचे हुए 72 कथित कब्जेदारों को एक और अवसर देने का निर्देश दिया था। उन्हें अपने चैंबर या दुकानें खाली करने या सक्षम प्राधिकारी के सामने यह बताने का मौका दिया गया था कि उन पर उनका वैध अधिकार किस आधार पर है।
कोर्ट ने कहा था कि यदि कब्जेदार अपना वैध दावा साबित करने में असफल रहते हैं तो संबंधित अवैध निर्माणों को हटाया जा सकता है।
अदालत ने नए सिरे से नोटिस देने का भी निर्देश दिया था। यदि किसी कब्जेदार को नोटिस नहीं मिलता है तो एक हिंदी और एक अंग्रेजी दैनिक में उसका प्रकाशन किया जाना था। इसके बाद कम से कम 10 दिन का समय देने का निर्देश था।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि तोड़फोड़ की कार्रवाई रविवार को की जा सकती है, ताकि न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो। कार्रवाई की तारीख की जानकारी संबंधित कब्जेदारों को पहले से देने को कहा गया।
अवैध कार्रवाई या तोड़फोड़ के दौरान किसी तरह की बाधा पैदा करने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
पुलिस और प्रशासन को समन्वय का निर्देश
हाईकोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को आपस में समन्वय कर नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं होनी चाहिए और अधिकारियों को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे से लोगों को हो रही थी परेशानी
यह कार्रवाई लखनऊ पीठ द्वारा जिला एवं सेशन कोर्ट परिसर के आसपास अवैध निर्माण और कब्जों को हटाने के पहले दिए गए निर्देशों के बाद शुरू हुई।
हाईकोर्ट ने पहले पाया था कि जिला एवं सेशन कोर्ट, पुराने हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व परिषद, पुराने सदर तहसील परिसर, उप निबंधक कार्यालय, कमिश्नरेट, रेजीडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर अवैध कब्जे से आम लोगों को परेशानी हो रही है।
नगर निगम ने पहले कोर्ट को बताया कि उसके आदेशों के बाद 100 से अधिक अवैध रूप से बनाए गए चैंबर हटाए जा चुके हैं।
इन कार्यवाहियों के दौरान 72 चिन्हित कब्जों में से शुरुआती चरण में केवल 14 ही हटाए जा सके थे। वकीलों के विरोध के कारण आगे की कार्रवाई प्रभावित हुई। नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि सभी 72 कब्जेदारों को नोटिस दिए गए, लेकिन वे यह स्पष्ट नहीं कर सके कि चैंबर या दुकानों पर उनका कब्जा किस वैध आधार पर है।
नगर निगम ने कार्रवाई के दौरान अधिवक्ताओं के विरोध की आशंका जताते हुए पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस बल की मांग भी की थी।
पांच हफ्ते में कार्रवाई का निर्देश
हाईकोर्ट ने अब अधिकारियों को शेष अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसे अधिमानतः पांच सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी। 4 अगस्त के आदेश के तहत वकीलों को मिली सुरक्षा भी अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।


