चाइनीज मांझे पर सख्त कानून लाएगी यूपी सरकार, पीड़ितों को मुआवजा देने पर भी विचार: हाईकोर्ट में दी जानकारी
Amir Ahmad
19 May 2026 3:32 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि जानलेवा चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून लाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित कानून में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ल की खंडपीठ को बताया गया कि प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग निषेध) अधिनियम रखा जा सकता है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल कानून का मसौदा तैयार करने और विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में राज्य कर विभाग, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, गृह विभाग और पर्यावरण विभाग समेत चार प्रमुख विभागों से परामर्श किया जा रहा है।
अदालत को यह भी बताया गया कि पुलिस अधिनियम में आवश्यक संशोधन पर भी विचार हो रहा है और हाल ही में इस संबंध में विशेष अभियान भी चलाया गया।
यह जानकारी वर्ष 2018 में दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दी गई। याचिकाकर्ता मोतीलाल यादव और रज्जन खान ने पूरे उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के आयात, बिक्री और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की।
राज्य सरकार की दलीलों पर गौर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित कानून पर विचार प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई से पहले कोई ठोस कदम सामने आना चाहिए।
अदालत ने कहा,
“इस अवैध और खतरनाक गतिविधि को रोकने के लिए निरंतर और नियमित प्रयास आवश्यक हैं। मांझे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।”
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता एडवोकेट सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी ने पतंग और पारंपरिक मांझा बेचने वाले व्यापारियों की ओर से पक्ष रखा।
उन्होंने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की आड़ में पारंपरिक और सुरक्षित पतंग सामग्री भी जब्त की जा रही है तथा व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है।
इस पर हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो व्यापारी अवैध गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, उन्हें किसी प्रकार की प्रताड़ना न दी जाए।
-हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पतंग और उससे जुड़े सामान बेचने वाले व्यापारियों को निरीक्षण और जांच के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करना होगा ताकि इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रत्येक शहर में उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए, जहां पतंगबाजी अधिक होती है। अदालत ने कहा कि ऐसे इलाकों में चाइनीज मांझे की बिक्री भी अधिक होने की संभावना है, जिससे निगरानी और नियंत्रण आसान होगा।
अदालत ने कहा,
“यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा है इसलिए अदालत इन सभी पहलुओं पर विचार कर रही है।”
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी। उस दिन राज्य कर विभाग, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक और पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया गया।
इन अधिकारियों को अदालत को यह बताना होगा कि चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और इसके लिए क्या तंत्र विकसित किया गया।
अदालत ने राज्य सरकार के वकील को यह भी निर्देश दिया कि अब तक जारी सभी सरकारी आदेशों और की गई कार्रवाई का अलग संकलन तैयार कर अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
साथ ही केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस मामले में उसकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, क्योंकि यह मुद्दा चाइनीज मांझे के आयात से संबंधित नहीं है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछली सुनवाई में हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि चाइनीज मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

