POSH Act | आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें अनिवार्य प्रकृति कीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
27 April 2026 12:23 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी पॉश कानून (POSH Act) के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट और सिफारिशें बाध्यकारी हैं मात्र सलाहात्मक नहीं।
जस्टिस मनीष माथुर ने कहा कि यदि ICC अपनी जांच में किसी कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का दोषी पाती है तो नियोक्ता या जिला अधिकारी के लिए उस आचरण को दुराचार मानते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करना अनिवार्य होगा।
अदालत ने कहा,
“कानून के उद्देश्य विधायिका की मंशा और कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि धारा 13 और 14 के तहत शिकायत समिति की सिफारिशें अनिवार्य प्रकृति की हैं, केवल परामर्शात्मक नहीं।”
मामला उन ICC सदस्यों से जुड़ा था, जिन्हें कर्मचारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न शिकायत की जांच के लिए नियुक्त किया गया। समिति ने जांच के बाद संबंधित कर्मचारी को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद न केवल आरोपी कर्मचारी बल्कि समिति के सदस्यों को भी निलंबित किया गया।
समिति सदस्यों ने निलंबन को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यदि केवल ICC रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी तो समितियां निष्पक्ष निर्णय देने के बजाय नियोक्ता के अनुरूप रिपोर्ट देने को बाध्य हो जाएंगी।
हाईकोर्ट ने माना कि ICC अर्ध-न्यायिक निकाय है और उसके सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले अनुशासनात्मक प्राधिकारी को यह दर्ज करना होगा कि प्रथम दृष्टया उन्होंने अपने दायित्वों के निर्वहन में कोई दुराचार किया।
अदालत ने कहा,
“अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण को भयमुक्त होकर निष्पक्ष निर्णय देने देना आवश्यक है। उसके सिर पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती नहीं रहनी चाहिए।”
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही यह भी जरूरी है कि शिकायत समितियां निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी भय या पक्षपात के कार्य कर सकें।
निलंबन आदेशों में पर्याप्त कारण और संतोष का अभाव पाते हुए अदालत ने समिति सदस्यों के निलंबन आदेश रद्द किए और याचिका स्वीकार की।

