वकीलों के आपसी विवाद में ट्रिब्यूनल का हस्तक्षेप अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
6 April 2026 2:51 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 से जुड़े मुआवजा मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वकीलों के आपसी विवाद में ट्रिब्यूनल का हस्तक्षेप बिल्कुल भी उचित नहीं है।
मामले में वर्ष 2019 में लोक अदालत के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली थी। वर्ष 2026 में MACT सुल्तानपुर के पीठासीन अधिकारी ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के पूर्व वकील को सुने बिना राशि जारी नहीं की जा सकती। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जस्टिस जसप्रीत सिंह ने मामले पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा,
“याचिकाकर्ता ने अपने वकील पर आरोप लगाए लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि दो वकीलों के आपसी विवाद में ट्रिब्यूनल खुद शामिल होता दिख रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने कहा कि पीठासीन अधिकारी का यह आचरण और आदेश उसकी अधिकारिता पर सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट ने MACT सुल्तानपुर के पीठासीन अधिकारी को निर्देश दिया कि वे स्पष्ट करें कि उन्हें ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार कैसे मिला, जिसमें पूर्व वकील को सुने बिना मुआवजा राशि जारी करने से रोका गया।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि 2019 में लोक अदालत के आदेश के बावजूद छह वर्षों तक मुआवजा राशि जारी क्यों नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की।

