अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

Amir Ahmad

9 Jan 2026 6:56 PM IST

  • अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

    इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।

    जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था।

    सुनवाई के दौरान 7 जनवरी को राज्य के अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील इंद्रसेन सिंह तोमर ने विपक्षी पक्ष संख्या दो, यानी पति, की ओर से पेश होने की अनुमति मांगी। इस पर याचिकाकर्ता पत्नी के वकील ने आपत्ति जताई और तर्क दिया कि चूंकि वकील तोमर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील के रूप में नियुक्त हैं, इसलिए वे उस मामले में किसी निजी पक्ष की ओर से पेश नहीं हो सकते, जिसमें राज्य सरकार पहले से ही पक्षकार है।

    इस आपत्ति के जवाब में अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील ने अदालत से समय मांगा ताकि वह ऐसे प्रावधान या नियम प्रस्तुत कर सकें, जिनके आधार पर उन्हें निजी पक्ष की ओर से पेश होने की अनुमति मिलती हो। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह का समय प्रदान किया।

    इसके साथ ही पीठ ने यह भी आवश्यक समझा कि इस विषय पर राज्य के विधि विभाग का आधिकारिक रुख सामने आए। अदालत ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील के अधिकारों और कर्तव्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, विशेषकर तब जब वह किसी निजी पक्ष की ओर से पेश होने की अनुमति मांग रहे हों।

    अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किन परिस्थितियों में निजी पक्ष की ओर से अदालत में उपस्थित हो सकता है। इसके लिए कौन-कौन से नियम या प्रावधान लागू होते हैं।

    अब इस मामले की आगे की सुनवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद की जाएगी।

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