'अपनी पसंद या जाति' का जांच अधिकारी मांगना अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
16 April 2026 4:43 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति यह मांग नहीं कर सकता कि किसी मामले की जांच उसके मनपसंद अधिकारी द्वारा या किसी विशेष जाति/समुदाय के अधिकारी द्वारा ही की जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी मांगें कानून के खिलाफ हैं।
जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने SC/ST Act से जुड़े मामले में यह टिप्पणी करते हुए आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई। इस मामले में शिकायतकर्ता ने पुनः जांच की मांग करते हुए विशेष रूप से अनुसूचित जाति के पुलिस अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि शिकायतकर्ता का यह आग्रह कानून के विपरीत है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग भी दर्शाता है। अदालत ने कहा कि कोई भी पक्ष यह नहीं तय कर सकता कि जांच किस अधिकारी द्वारा की जाए।
मामले के तथ्यों के अनुसार पहले आरोपियों की ओर से शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद कथित तौर पर जवाबी कार्रवाई के रूप में शिकायतकर्ता ने आवेदन देकर FIR दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने कोई अपराध न पाए जाने पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने विरोध याचिका दाखिल कर जांच पर पक्षपात का आरोप लगाया और नई जांच की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि जांच अनुसूचित जाति के अधिकारी से कराई जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता साफ नीयत से अदालत नहीं आया और वह पूरी प्रक्रिया को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहता है, जो स्वीकार्य नहीं है।
इसी आधार पर अदालत ने मामले की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय की।

