गंगा में नाव पर इफ्तार विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को भी दी जमानत

Amir Ahmad

19 May 2026 2:05 PM IST

  • गंगा में नाव पर इफ्तार विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को भी दी जमानत

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, कथित तौर पर मांसाहारी भोजन करने और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार बाकी 6 मुस्लिम आरोपियों को भी जमानत दी।

    जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि इसी FIR में शामिल 8 अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।

    गौरतलब है कि 15 मई को जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल ने 5 आरोपियों और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को जमानत दी थी। सोमवार के आदेश के बाद अब मामले के सभी 14 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।

    आरोपियों ने वाराणसी सेशन कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल को जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

    मामले में वाराणसी पुलिस ने 17 मार्च को भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

    आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिनमें वैमनस्य फैलाने, सार्वजनिक उपद्रव, सार्वजनिक जल स्रोत को दूषित करने, धार्मिक स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और जबरन वसूली से संबंधित धाराएं शामिल हैं। साथ ही जल प्रदूषण निवारण अधिनियम की धारा 24 भी लगाई गईं।

    शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने पवित्र गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार के दौरान चिकन बिरयानी खाई और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंक दिया, जो “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” है।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि यह कृत्य जानबूझकर जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुईं और व्यापक जनाक्रोश पैदा हुआ।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 मई के अपने 16 पन्नों के आदेश में जस्टिस शुक्ल ने कहा था कि आरोपियों का कथित कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है लेकिन आरोपियों ने अपने शपथपत्रों में सच्चा पश्चाताप व्यक्त किया है।

    हालांकि, अदालत ने आरोपियों के खिलाफ लगाए गए जबरन वसूली के आरोपों को संदिग्ध माना।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा,

    “यह मामला मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा रोजा इफ्तार पार्टी आयोजित करने से जुड़ा है। इस दौरान कथित तौर पर मांसाहारी भोजन किया गया और उसका बचा हिस्सा गंगा नदी में फेंका गया। अदालत की निष्पक्ष राय में यह कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।”

    इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को जमानत दी।

    Next Story