रिश्ता टूटने के बाद बदले की भावना से दर्ज हुई दुष्कर्म की FIR: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया मुकदमा

Amir Ahmad

24 July 2026 1:21 PM IST

  • रिश्ता टूटने के बाद बदले की भावना से दर्ज हुई दुष्कर्म की FIR: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया मुकदमा

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहमति से बने प्रेम संबंध के टूटने के बाद दर्ज दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि यह मामला असफल प्रेम संबंध का उदाहरण है। अदालत ने पाया कि FIR तब दर्ज कराई गई, जब आरोपी ने संबंध समाप्त कर किसी अन्य महिला से विवाह करने का फैसला लिया।

    जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 504 और 506 के तहत दर्ज आरोपपत्र, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।

    अदालत ने कहा,

    "इस मामले में दुष्कर्म का कोई अपराध नहीं बनता। पीड़िता आरोपी के व्यवहार से नाराज थी और उसे छोड़ना नहीं चाहती थी। उसके आचरण से प्रतीत होता है कि FIR आरोपी से बदला लेने की नीयत से दर्ज कराई गई।"

    मामले में महिला ने आरोप लगाया कि फेसबुक के माध्यम से उसकी आरोपी से पहचान हुई और विवाह का झूठा वादा कर उससे शारीरिक संबंध बनाए गए। बाद में आरोपी ने किसी अन्य महिला से विवाह तय होने पर शादी से इनकार किया।

    हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि दोनों के बीच करीब डेढ़ वर्ष तक सहमति से संबंध रहे। पीड़िता ने अपने बयान में स्वयं स्वीकार किया था कि इस दौरान आरोपी के साथ उसके 30 से 40 बार शारीरिक संबंध बने।

    हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही विवाह करने का झूठा वादा किया। अदालत के अनुसार, बाद में संबंध टूट गए और जब आरोपी ने स्वयं को इस रिश्ते से अलग कर लिया तथा पीड़िता ने इसे स्वीकार नहीं किया, तब उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई।

    अदालत ने कहा कि केवल इसलिए आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता कि प्रेम संबंध विवाह तक नहीं पहुंच पाया।

    पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई बालिग, शिक्षित और समझदार महिला अपनी स्वतंत्र इच्छा से प्रेम संबंध में प्रवेश करती है तो उसे यह भी समझना चाहिए कि विवाह का वादा और विवाह दो अलग-अलग बातें हैं तथा ऐसे संबंधों में अनिश्चितता की संभावना बनी रहती है।

    हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हाल के वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जिनमें लंबे समय तक सहमति से चले संबंध टूटने के बाद उन्हें आपराधिक मुकदमों का रूप देने की कोशिश की जाती है।

    अदालत ने माना कि इस मामले में मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए उसने पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।

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