कॉकरोच जनता पार्टी पर NIA-ED जांच की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

Amir Ahmad

29 May 2026 5:37 PM IST

  • कॉकरोच जनता पार्टी पर NIA-ED जांच की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत डिपके के खिलाफ NIAऔर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग को लेकर एक आपराधिक जनहित याचिका दाखिल की गई।

    यह याचिका कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सभी सोशल मीडिया अकाउंट, पेज, चैनल, समूह और प्रोफाइल को स्थायी रूप से बंद और ब्लॉक करने की मांग भी की गई।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि यह सुनियोजित डिजिटल अभियान भारत के युवाओं को भड़काने, सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने और केंद्र सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी के बाद इस अभियान को बढ़ावा दिया गया।

    आरोप है कि अदालत की कार्यवाही के छोटे और कथित रूप से भ्रामक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर फैलाकर माहौल बनाने की कोशिश की गई।

    याचिका में दावा किया गया कि अभिजीत डिपके अमेरिका के किसी अज्ञात स्थान से डिजिटल सूचना युद्ध चला रहे हैं और कॉकरोच जनता पार्टी के जरिए भारत में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

    याचिकाकर्ता ने डिपके पर आम आदमी पार्टी से जुड़े होने और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें मनीष सिसोदिया का नाम भी शामिल है, से करीबी संबंध होने का आरोप लगाया।

    याचिका में यह भी कहा गया कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अदृश्य भूमिका इस अभियान के पीछे हो सकती है।

    हालांकि, याचिका में लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इस पूरे अभियान में विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है और क्रिप्टोकरेंसी तथा हवाला माध्यमों से 500 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है।

    याचिकाकर्ता ने अभिजीत डिपके के कथित संबंध कुछ सोशल मीडिया हस्तियों, विदेशी अधिकारियों और कश्मीर में सक्रिय आतंकी तत्वों से होने का भी दावा किया।

    याचिका में कहा गया कि इन गतिविधियों की जांच भारतीय न्याय संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, धनशोधन निवारण अधिनियम और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत की जानी चाहिए।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि खुफिया ब्यूरो, अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग, सैन्य खुफिया, एनआईए और ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की जाए।

    इसके अलावा अभिजीत डिपके के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने, अमेरिका से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने और सोशल मीडिया मंचों को संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की गई।

    याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे डिजिटल नेटवर्क और अकाउंट की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

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