झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
Amir Ahmad
30 April 2026 4:55 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने शपथपत्र में गलत जानकारी दी और अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों को छिपाया।
चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में लागत लगाना आवश्यक है ताकि निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिका का सहारा लेने वालों को हतोत्साहित किया जा सके।
याचिकाकर्ता पेशे से एडवोकेट है। उसने आरोप लगाया था कि मेरठ स्थित दौराला शुगर मिल ने सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है जिससे ग्रामीणों को भारी असुविधा हो रही है। उसने कहा कि कई शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मिल की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुका है और विभिन्न गतिविधियों में संलिप्त रहा है। साथ ही उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं। यह भी दलील दी गई कि वह मिल प्रबंधन से निजी रंजिश के कारण याचिका लाया है।
प्रतिवादी ने कहा कि शुगर मिल पिछले 90 वर्षों से संचालित है और अब तक कभी ऐसा कोई विवाद नहीं उठा। गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद याचिकाकर्ता मिल प्रबंधन को परेशान करने का प्रयास कर रहा है।
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में केवल इतना बताया कि वह वकील है और उस मार्ग से गुजरता है, जबकि गन्ना विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष होने की जानकारी उसने तब दी जब प्रतिवादियों ने उसकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए।
अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया और न्यायालय के साथ लुका-छिपी करने का प्रयास किया।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि झूठे हलफनामे और निजी हित से प्रेरित जनहित याचिकाओं पर कठोर रुख अपनाना आवश्यक है।

