सुबह 6 बजे खुला इलाहाबाद हाईकोर्ट, परीक्षा से तीन घंटे पहले अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में बैठने की मिली राहत
Amir Ahmad
29 Jun 2026 12:29 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार सुबह 6 बजे विशेष सुनवाई कर सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) 2025 मुख्य परीक्षा के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी।
अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अभ्यर्थी शालिनी पांडे को अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। परीक्षा उसी दिन सुबह 9 बजे शुरू होनी थी।
मामले की अत्यधिक तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य जस्टिस के 27 जून 2026 के प्रशासनिक आदेश के बाद जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने अपने आवास पर विशेष बैठक कर सुनवाई की।
शालिनी पांडे ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
इसके बाद उन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और 17 मई 2026 को आवेदन पत्र की मुद्रित प्रति तथा सभी स्वप्रमाणित शैक्षणिक दस्तावेज स्पीड पोस्ट के माध्यम से आयोग को भेज दिए।
याचिका के अनुसार, दस्तावेज समय पर आयोग को प्राप्त भी हो गए, लेकिन 11 जून 2026 के आदेश के जरिए केवल इस आधार पर उनका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया गया कि उन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी जमा नहीं की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि इसी तरह के एक मामले में हाइकोर्ट की समन्वय पीठ पहले ही एक अभ्यर्थी को अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे चुकी है। इसलिए वर्तमान मामले में भी वही राहत दी जानी चाहिए।
आयोग की ओर से पेश वकील आर. के. उपाध्याय ने इस तथ्य का विरोध नहीं किया कि याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के अधिकारी इस याचिका और इसकी सुनवाई से पहले ही अवगत हैं तथा अभ्यर्थी को अस्थायी रूप से परीक्षा में शामिल कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने शालिनी पांडे को मुख्य परीक्षा में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी।
अदालत ने कहा,
"याचिकाकर्ता का अभ्यर्थन केवल इस आधार पर निरस्त किया गया कि उसने आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी जमा नहीं की। इसलिए उसे वर्तमान याचिका में आगे पारित होने वाले आदेशों के अधीन अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाती है।"
जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने आयोग के अधिवक्ता को तत्काल आयोग के सचिव को सूचित करने का निर्देश दिया, ताकि लखनऊ के किसी भी परीक्षा केंद्र पर याचिकाकर्ता को परीक्षा में बैठने की अनुमति सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने याचिकाकर्ता को 11 जून 2026 के आदेश को चुनौती देने के लिए संशोधन आवेदन दाखिल करने की भी अनुमति दी है।
वहीं, राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया, जबकि इसके बाद याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल कर सकेगी।
मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 को होगी।

