'24 कोसी परिक्रमा मार्ग' परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 Jun 2026 6:09 PM IST

  • 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हित को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा।

    जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें संभल में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग के निर्माण को रोकने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना है और परियोजना के कारण उनकी जमीन प्रभावित होगी।

    उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए अपनी योजना के तहत 24 कोसी वंश गोपाल तीर्थ परिक्रमा मार्ग के नए निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को मंजूरी दी है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

    याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि सरकार की धार्मिक परियोजना के कारण उनकी भूमि प्रभावित हो रही है, जहां वे कोल्ड स्टोरेज स्थापित करना चाहते हैं। उनका कहना था कि इसके लिए वे ऋण लेने की तैयारी कर रहे हैं और यदि परिक्रमा मार्ग का निर्माण हुआ तो उनका निवेश प्रभावित होगा तथा उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

    अदालत ने कहा,

    “परिक्रमा मार्ग सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है। यह स्थापित विधिक सिद्धांत है कि सरकार की ऐसी नीतियों में, जो व्यापक जनहित की पूर्ति करती हैं, व्यक्तिगत हित को पीछे हटना पड़ता है। इसलिए हम परिक्रमा मार्ग के निर्माण पर रोक नहीं लगा सकते।”

    सुनवाई के दौरान जब अदालत ने निर्माण पर रोक लगाने से इनकार किया तो याचिकाकर्ताओं की ओर से आग्रह किया गया कि कम-से-कम उन्हें यह बता दिया जाए कि उनकी कितनी भूमि परियोजना में आएगी।

    इस पर हाईकोर्ट ने संभल के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उस भूमि का सीमांकन कराएं, जो परिक्रमा मार्ग में शामिल होगी। साथ ही शेष बची भूमि को स्पष्ट रूप से अलग चिन्हित किया जाए।

    अदालत ने कहा कि सीमांकन के बाद यह निर्णय याचिकाकर्ता स्वयं करेंगे कि बची हुई भूमि पर वे कोल्ड स्टोरेज का निर्माण करना चाहते हैं या नहीं।

    हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के तहत अनुमति हो, तभी परिक्रमा मार्ग से बाहर बची हुई भूमि पर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जा सकेगा।

    इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।

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