एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट

Amir Ahmad

10 Jan 2026 6:25 PM IST

  • एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट

    इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक अपील को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे और अपील का निर्णय मामले के गुण-दोष के आधार पर करे, न कि अनुपस्थिति के कारण।

    जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त के वकील की गैर-हाजिरी के कारण आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 425 के प्रावधानों के विपरीत है, जो पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 384 के अनुरूप है।

    यह मामला संजय यादव द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण से जुड़ा था। संजय यादव को मई दो हजार बाईस में गोरखपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा एक सौ अड़तीस के अंतर्गत दोषसिद्ध किया गया, जो चेक अनादरण से संबंधित था।

    इस दोषसिद्धि के विरुद्ध उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर सत्र न्यायालय में वैधानिक आपराधिक अपील दाखिल की। इसके बावजूद अक्टूबर दो हजार तेईस में अभियुक्त के वकील की अनुपस्थिति के कारण उक्त अपील डिफॉल्ट में खारिज कर दी गई।

    इसके पश्चात अभियुक्त ने एक नई आपराधिक अपील दाखिल की और सीमाबद्धता अधिनियम की धारा पाँच के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर लगभग आठ माह की देरी को माफ करने तथा अक्टूबर, 2023 के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया।

    स्पेशल जज, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम, गोरखपुर ने सितंबर पिछले वर्ष इस आवेदन को भी अस्वीकार कर दिया। इसके बाद अभियुक्त ने हाइकोर्ट में वर्तमान आपराधिक पुनरीक्षण दाखिल किया।

    हाइकोर्ट ने प्रारंभ में ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 425 का उल्लेख करते हुए कहा कि अपीलीय न्यायालय केवल अधिवक्ता की अनुपस्थिति के आधार पर अपील खारिज नहीं कर सकता। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के. मुरुगानंदम तथा अन्य बनाम राज्य, प्रतिनिधि पुलिस अधीक्षक, पर भरोसा जताते हुए कहा कि यदि अभियुक्त अपने द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित नहीं होता है तो न्यायालय को एमिकस क्यूरी नियुक्त कर सुनवाई करनी होगी, लेकिन अपील को गैर-प्रतिनिधित्व के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

    हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि अभियुक्त के लिए दूसरी आपराधिक अपील दाखिल करने की कोई विधिक आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि पहली अपील पहले ही समय सीमा के भीतर दाखिल की जा चुकी थी। पहली अपील का निस्तारण केवल मामले के गुण-दोष के आधार पर ही किया जाना चाहिए था।

    इन तथ्यों के आधार पर हाइकोर्ट ने 26 अक्टूबर, 2023 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके द्वारा मूल आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज किया गया।

    साथ ही अपीलीय न्यायालय को निर्देश दिया गया कि बहाल की गई अपील का निस्तारण यथाशीघ्र गुण-दोष के आधार पर किया जाए।

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