राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

Amir Ahmad

6 July 2026 3:21 PM IST

  • राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चंदा विवाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने कहा कि इसी तरह की मांग वाली एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

    जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वकील मोहित अशोक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद, सोना और चांदी के चढ़ावे के कथित गबन की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई। साथ ही, ट्रस्ट के खातों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से विशेष फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया गया।

    याचिकाकर्ता ने 8 जून को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि मंदिर के दानपात्र में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई राशि का कुछ ट्रस्ट कर्मचारियों ने कथित रूप से गबन किया।

    याचिका में कहा गया कि चार संदिग्ध कर्मचारियों को पुलिस हिरासत में लिया गया और ट्रस्ट के एक कर्मचारी से जुड़े बैंक खाते से करीब पांच लाख रुपये भी बरामद किए गए। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मामले से इनकार करने की कोशिश कर रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि इन आरोपों के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस दल की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं जबकि पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन इसके सदस्य हैं।

    इससे पहले ट्रस्ट ने चढ़ावे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गिनती, सत्यापन और सुरक्षित जमा करने की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है।

    बाद में 25 जून को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ चढ़ावे में कथित गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों में FIR भी दर्ज की गई।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि इसी मुद्दे पर समान राहत की मांग वाली एक याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है। इस आधार पर अदालत ने वर्तमान जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार किया।

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