NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत केवल पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स ही कर सकता है: इलाहाबाद हाइकोर्ट
Amir Ahmad
29 Jan 2026 12:45 PM IST

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस से संबंधित शिकायत कोई तीसरा व्यक्ति दाखिल नहीं कर सकता, भले ही उस लेन-देन से वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्यों न हो।
हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायत केवल चेक के पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स द्वारा ही दायर की जा सकती है।
जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स का अधिकृत प्रतिनिधि, जैसे पावर ऑफ अटॉर्नी धारक या कंपनी का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, शिकायत दाखिल कर सकता है, लेकिन शिकायत का नाम फिर भी पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स का ही होना चाहिए।
मामले के संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि 8 अगस्त 2012 को एम/एस कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स द्वारा अपने साझेदार सरोज दुबे के माध्यम से एक शिकायत दाखिल की गई।
इसमें आरोप लगाया गया कि मैंगलम रेस्टोरेंट एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजेश कुकरेजा ने NI Act की धारा 138 तथा भारतीय दंड संहिता की धाराओं 406 और 420 के तहत अपराध किए हैं। आरोप था कि कुल 22 लाख रुपये के 11 चेक अनादरित हो गए।
हालांकि शिकायत एम/एस कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स द्वारा दाखिल की गई थी, लेकिन सभी 11 चेक 'होटल पैराडाइस' के नाम पर जारी किए गए। प्रारंभ में कानपुर नगर के मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता के लोकस स्टैंडी पर सवाल उठाया, लेकिन जुलाई 2013 में यह कहते हुए आरोपी को तलब कर लिया गया कि होटल पैराडाइस, एम/एस कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स की एक इकाई है।
इस आदेश को राजेश कुकरेजा ने इलाहाबाद हाइकोर्ट में चुनौती दी।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब चेक होटल पैराडाइस के नाम पर जारी हुए थे, तो शिकायत उसी के द्वारा या उसके अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा दाखिल की जानी चाहिए, न कि एम/एस कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स या उसके साझेदार द्वारा।
वहीं मूल शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि होटल पैराडाइस का नाम केवल मार्केटिंग उद्देश्य से दिया गया और एक मौखिक समझौते के तहत वार्षिक टर्नओवर का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाना था। यह भी कहा गया कि सरोज दुबे होटल पैराडाइस की साझेदार हैं, इसलिए उन्हें शिकायत दाखिल करने का अधिकार है।
हाइकोर्ट ने NI Act की धारा 142 का हवाला देते हुए कहा कि कानून स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य करता है कि धारा 138 के तहत अपराध का संज्ञान केवल उसी स्थिति में लिया जा सकता है, जब शिकायत पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स द्वारा लिखित रूप में दाखिल की गई हो।
हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 7 और 9 के अनुसार पेयी वही होता है, जिसके नाम चेक जारी किया गया हो और होल्डर इन ड्यू कोर्स वही व्यक्ति होता है, जो वैध रूप से चेक का धारक हो और राशि प्राप्त करने का अधिकारी हो।
हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लेन-देन से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित भी होता है तब भी यदि वह पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स नहीं है तो उसे धारा 138 के तहत शिकायत दाखिल करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता।
इन निष्कर्षों के आधार पर हाइकोर्ट ने माना कि सरोज दुबे और एम/एस कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स को शिकायत दाखिल करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था, क्योंकि चेक किसी अन्य इकाई यानी होटल पैराडाइस के नाम पर जारी किए गए।
परिणामस्वरूप, हाइकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया।

