जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Amir Ahmad

2 Jun 2026 5:42 PM IST

  • जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

    अदालत ने LIC कर्मचारियों के संगठन द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम और उससे संबंधित नियम प्रशासन को ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार प्रदान करते हैं।

    जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने यह निर्णय उत्तर मध्य क्षेत्र बीमा कर्मचारी संघ की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें जनगणना कार्य के लिए LIC कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती दी गई।

    याचिकाकर्ता का तर्क था कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4-ए के तहत केवल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को ही गणनाकर्ता या पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, जबकि एलआईसी कर्मचारी स्थानीय निकाय की श्रेणी में नहीं आते।

    हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि अधिनियम की धारा 4-ए को अलग-थलग करके नहीं पढ़ा जा सकता। इसे धारा 6(1)(ई) और धारा 7(सी) के साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि कारखानों, फर्मों और विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है।

    सरकार ने कहा कि LIC एक वाणिज्यिक संस्थान है और उसके कर्मचारियों की सेवाएं जनगणना कार्य के लिए लेना पूरी तरह वैधानिक है।

    अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि राज्य सरकार की अधिसूचना के आधार पर अधिकृत अधिकारी द्वारा LIC अधिकारियों और कर्मचारियों को गणनाकर्ता तथा पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था।

    पीठ ने कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 6 प्रशासन को वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार देती है। वहीं धारा 7 के तहत ऐसे व्यक्तियों को जनगणना कार्य में सहयोग करने का निर्देश दिया जा सकता है और वे उसका पालन करने के लिए बाध्य होते हैं।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिनियम में प्रयुक्त “संस्थान” शब्द का दायरा व्यापक है। इसमें ऐसे सभी संगठित निकाय शामिल हैं, जहां आधिकारिक, वाणिज्यिक, औद्योगिक, शैक्षणिक या प्रशासनिक कार्य किए जाते हैं। इस परिभाषा के अंतर्गत LIC जैसे वाणिज्यिक संस्थान भी आते हैं।

    अदालत ने जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 का भी उल्लेख किया, जिसमें गणनाकर्ता के लिए पात्र व्यक्तियों की श्रेणी में “शिक्षक, लिपिक, कोई अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति” शामिल किया गया है।

    पीठ ने कहा कि “कोई भी व्यक्ति” शब्दावली का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसे केवल सरकारी कर्मचारियों या स्थानीय निकायों के अधिकारियों तक सीमित नहीं किया जा सकता।

    फैसले में अदालत ने LIC बनाम नगर आयुक्त, कानपुर मामले में वर्ष 2011 के अपने पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाए जाने को वैध माना गया था।

    इन सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी आदेश को सही ठहराया और कहा कि LIC कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए गणनाकर्ता एवं पर्यवेक्षक नियुक्त करना कानून के अनुरूप है।

    अदालत ने याचिका को निराधार और विधिक आधार से रहित बताते हुए खारिज कर दिया।

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